नवसृजन

हृदय में उमड़ते भावों को

शब्दों का रूप देने का प्रयास

और हो जाता है नवसृजन

प्रसन्नता की अलौकिक अनुभूति


कभी कविता और कभी कहानी

विचारों का एक मंथन निरंतर

कराकर सौन्दर्य की अनुभूति

बन जाता सदा कोई नवसृजन


अपने आगोश में लेकर पत्थर

नदियों का अनवरत आगे बढना

चहुंओर दूर तलक दृष्टि जाएं जहां

वहां तक नवसृजन कर जाना


पतझड़ के पश्चात् बसंत

पीत पात का अलग होना

परंतु एक सुखद अहसास

नवकोंपल का विटप पर खिलना


बीजों से नव सृजन होकर

धरा पर अन्न भंडार है भरता

और वसुधा का सीना चीरकर

कृषक भी नवसृजन करता


स्वरचित एवं मौलिक

अलका शर्मा, शामली, उत्तर प्रदेश