गजल संग्रह लम्हा-लम्हा का हुआ विमोचन, सराहे गये साहित्यरथी सौरभ

प्रतापगढ़। ग़ज़ल कहना और ग़ज़ल को जीना बेहद कठिन और दुष्कर कार्य इसलिए है क्योंकि इसमें व्यक्ति को सामाजिक सरोकारों से अपने को जोड़कर जीवन के संघर्षों को शब्दों की मर्यादा में पिरोना पड़ता है। उक्त बातें देश के वरेण्य नवगीतकार यश मालवीय ने जनपद के ख्यातिलब्ध ग़ज़लकार राजमूर्ति सौरभ के दूसरे ग़ज़ल संग्रह लम्हा-लम्हा सोच रहा हूँ के विमोचन के अवसर पर कहीं। देश के वरिष्ठ कवि जमुना प्रसाद उपाध्याय ने जहाँ सौरभ को घर-परिवार के सौहार्द्र और सामाजिक विसंगतियों पर पैनी नज़र रखने वाला प्रहरी ठहराया।

 वहीं श्रीकांत त्रिवेदी प्रांजल ने उनके व्यहारिक पक्ष को व्याख्यायित किया। ग़ज़लकार डा. अनुज नागेन्द्र ने एक दोहे के माध्यम से कहा कि-सौरभ साहित्य में, जनपद के अस्तित्व काव्य जगत में पूज्य हैं, सरल-सौम्य व्यक्तित्व।। डा. दीपक रूहानी ने सौरभ जी को सुखद अनुभूतियों से विस्मित कर देने वाला ग़ज़लकार बताया तो सुधीर बेकस ने उनको साहित्य का वटवृक्ष कहा। जय चक्रवर्ती ने उनके रचना वैविध्य को सराहा तो रामबाबू रस्तोगी ने उनको श्रेष्ठ जनवादी कवि और रचनाधर्मी के रूप में प्रणम्य बताया। शाहिद जमाल और शोभनाथ फ़ैज़ाबादी ने उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को सराहा। 

जहाँ डा. आफ़ताब जौनपुरी ने सौरभ को समर्पित एक ख़ूबसूरत ग़ज़ल सुनायी। वहीं तेजबहादुर सिंह ने सौरभ ग़ज़लों की सांगीतिक प्रस्तुति से समां बांधी। इस मौके पर ओमप्रकाश खण्डेलवाल, डा. अखिलेश पाण्डेय, डा. राजेन्द्र राज, डा. दयाराम मौर्य रत्न, डा. शाहिदा, डा. संगमलाल भँवर, डा. बृजभानु सिंह, हेमन्त नंदन ओझा, अनीस देहाती, विजय बहादुर अक्खड,़ राजेन्द्र यादव, फैय्याज परवाना, गुरुबचन सिंह बाघ, पवन पाण्डेय मुआफ़िक, रविशंकर मिश्र, कवयित्री प्रीति पाण्डेय, सन्तोष विद्रोही, शाइर ख़ुर्शीद अम्बर, स्वामी नाथ शुक्ल आदि ने प्रकाशित कृति पर अपने अमूल्य विचार दिये। 

कार्यक्रम संचालन कवि सुनील प्रभाकर ने और आभार प्रदर्शन शिखा सिंह परिहार प्रज्ञा ने किया। कार्यक्रम में डा.पीयूषकान्त शर्मा, डा. बच्चाबाबू वर्मा, अनिल त्रिपाठी प्रवात, चन्द्रकान्त त्रिपाठी चंद्र, रवीन्द्र अजनबी, अंजनी अमोघ, गजेंद्र विकट, राजेश मिश्र, हरिबहादुर हर्ष, सत्येन्द्र सिंह सौम्य, राजेश प्रतापगढ़ी, सत्यम शार्दूल, अमानत खान, ओमप्रकाश पंछी, सुरेश नारायण व्योम, शिवपवन दुबे, प्रमोद दुबे लंठ, शीतला प्रसाद सुजान, विनय शुक्ल, आनन्द सिंह, देशराज घायल, रेणुका सिंह आदि रहे।