काव्य

बारहा सवालों से घिरा रहता है

ज़ख्म ए दिल यूँ हरा सा रहता है। 


दिल जब भी उदास सा होता है

लगता गुमशुदा सा रहता है। 


ये दिल बस भरा -भरा सा रहता है

जाने कैसा नशा सा रहता है। 


हसरत लिए दिल बहक जाता है

वो जिसके आस-पास रहता है। 


एहसासों में हरपल बसा रहता है

कैसे कहें वो ख़ुदा सा रहता है।


जब दौर रहा आजमाईशों का

जी़स्त के पन्नों पर हँसी रखता है। 


दर्द दिल में सब छुपा रखता है

बशर ऐसा कोई-कोई सा होता है। 


✍️ सपना चन्द्रा

कहलगाँव भागलपुर बिहार