बाट जोहुँ मैं श्याम तुम्हारे

धूप किनारे ,प्रीतम प्यारे ,कदम्ब की छाँव तुझे पुकारे,

लग गये झूले डाल डाल पर,बाट जोहुँ मैं श्याम तुम्हारे।

सूनी अँखियाँ मोरी,तनिक है विस्मित,तनिक है सस्मित,

आओगे तुम अबके सावन,पंकिल हुये ये नयन कजरारे।


गये थे आने का वादा करके, हम बैठे हैं उसके सहारे,

तेरी यादें बरस रही अब,मेघ बन गये हैं मौसम सारे।

आओ न मोरा श्याम सलोना,अब न इतना तड़पाओ,

देखो निशा बैठी सजधज कर,झिलमिल करते सितारे।


मुझ अनगढ़ सी विरहन को बोलो अब कौन सँवारे?

केश के मोहपाश में बंध, तुम हो जाते थे वारे न्यारे।

आज अवगुंठन खुल रहा,मुक्ताहाल नैनों से गिर रहा,

मधुप भी तुम बिन क्यों विषधर सा डंक है मारे?


                           रीमा सिन्हा(लखनऊ)