बहू ही दहेज है।

मिनी अपने मां बाप की बहुत संस्कारी और पढ़ने में होशियार लड़की थी। जैसे कि हर मां बाप की इच्छा होती है कि उनकी लड़की की शादी अच्छे घर में हो जाए और उसे अच्छा पति और घर-बार मिल जाए कुछ ऐसी ही मिनी के मां-बाप की इच्छा भी थी ।

मिनी पोस्टग्रेजुएट थी, उसके मां-बाप उसके लिए सही समय देख योग्य वर ढूंढने लगते हैं । उनको राजन नाम का लड़का पसंद आता है। राजन के मां-बाप को भी मिनी बहुत पसंद आती है।

दोनों एक दूसरे को पसंद करने लगते हैं, मिनी और राजन का रिश्ता तय हो जाता है।

सगाई के दिन राजन के माता-पिता मिनी के माता-पिता से कहते हैं कि हमें तुमसे कुछ बातें करनी है और वह चारों बातें करने लगते हैं । राजन के मां-बाप मिनी के मां-बाप से 'देखो, हमारे राजन को आपकी बेटी बहुत पसंद हैं'। तब वो दोनों बोलते हैं हमें भी दामाद अच्छा मिला है।

"अच्छा मिला है मतलब तो आप इसके लिए क्या कर रहे है?" हम इसको बहुत प्यार करते हैं ।

प्यार करने से क्या होता हैं? देखो कल को हमारे बेटे का मन बिजनेस करने का करेंगा तो उसके लिए पैसे तो चाहिए ही और वैसे भी जो आप देंगे अपनी बेटी को ही देंगे हमें तो कुछ नहीं चाहिए । कम से कम आप 20,00,000 रुपए तो दे दीजिए लोग तो अपनी बेटियों की शादी में 50 - 50 लाख देते हैं । हम तो बस आपसे बीस लाख रुपए मांग रहे हैं।

मिनी की मम्मी बोलती है कि इतने पैसे........

(मिनी के पापा जैसे तैसे करके शादी के दिन तक 20,00,000 रूपए का इंतजाम करते हैं।)

मिनी और राजन की शादी हो जाती है।

मिनी राजन से मुझे अपनी सहेली कल्पना के घर जाना हैं, हां तो चली जाना मिनी।

मिनी पूछती हैं - "कैसे"?

राजन - "थ्री व्हीलर या कैब से"

मिनी - "चली जाना मतलब नहीं, आप आज ड्राइवर और गाड़ी छोड़ जाना । मैं इतनी गर्मी में थ्री व्हीलर या कैब से जाने वाली नहीं । मैं तो अपनी गाड़ी से ही जाऊंगी ।"

बेटा जब राजन कह रहा हैं तो तुम कैब से चली जाना।

नहीं मम्मी जी, नहीं मेरे पिताजी ने 20 लाख रुपए इसलिए नहीं दिए कि मैं कैब से जाऊं । मैं तो अपनी गाड़ी से ही जाऊंगी।

राजन बेटा ले जा मिनी को उसको उसकी सहेली के घर छोड़ देना।

चलो मिनी जल्दी करो , मुझे ऑफिस को लेट हो रहा हैं।

मिनी राजन के साथ अपनी सहेली के घर चली जाती हैं और बोलती है आते हुए आप मुझे वापस भी ले लेना।

मिनी और राजन के जाने के बाद राजन के मां-बाप बोलते हैं कैसी जिद्दी लड़की है । राजन बोल रहा था मैं लेट हो रहा हूं फिर भी नहीं मानी। फट से राजन के साथ गाड़ी में बैठ कर चली गई।

कुछ दिन बाद राजन मिनी से बोलता है मिनी मेरी मौसी - मौसा जी 8 दिन के लिए रहने आ रहे हैं।

मिनी बोलती है अच्छी बात है यह तो, हां मम्मी जी से बोल दो किसी कुक का इंतजाम कर ले ।

राजन की मम्मी बोलती हैं कूक किस लिए?

मम्मी जी इतने जनों का काम आपसे तो होगा नहीं थक जाओगी आप और मैं करूंगी नहीं । मेरे मां-बाप ने 20 लाख रुपए कोई मुझसे रसोई का काम करवाने के लिए थोड़ा ही  खर्चे हैं।

राजन के मौसी मौसा जी आ जाते हैं।

"अरे नीता, तुम ही रसोई का काम करती रहती हो क्या? बहू कुछ नहीं करती वह सारा दिन बस एसी में लेटी रहती है क्या ?"

'क्या कहूं?' मौसी जी, मैं तो बहू के आने के बाद और ज्यादा काम करने लगी हूं । ऐसा लगता है जैसे वह बहू नहीं मैं बहू हूं।

क्या रमेश भी बहू को कुछ नहीं कहता?

कहता क्या नहीं बहू तो  दहेज में आए पैसों का ही रौब दिखाती हैं।

मौसा जी ऐसा क्या तुमने बहुत मोटी रकम मांगी थी दहेज में।

"न ना, 20 लाख मांगे थे' और वह तो बैंक में रखे हैं। हमें थोड़ा ही खाने हैं कल को बच्चो के ही काम आएंगे।

जब तुमने इतने पैसे लिए है तो बहू काम क्यों करेगी, दहेज लोगे तो बहू काम नहीं करेगी।

इतने में मिनी वहां आ जाती है और बोलती है मौसी जी - मौसा जी, मम्मी - पापा आपको मेरे व्यवहार से बहुत दुख हो रहा होगा।

नीता- "जा जा, अपना काम कर। सबके सामने ज्यादा भला बनने की कोशिश मत कर , सबको तेरी असलियत पता हैं।"

मिनी - 'हां मम्मी जी, मैं जानती हूं जो मैं व्यवहार कर रही हूं वह बिल्कुल सही नहीं हैं। आप लोगों को मेरे व्यवहार से दुख पहुंच रहा होगा। मेरा भी मन किसी का दिल दुखाने का नहीं था परंतु मैं क्या करूं? मेरे मां - बाप ने मेरी शादी में कर्जा लिया था ।आप सोच रहे थे कि उन्होंने यह पैसे अपनी खुशी से दिए हैं। नहीं ऐसा नहीं है, उस कर्जे में तो उनका मकान भी बिक गया

और वह एक कमरा लेकर गरीबों सी जिंदगी बिता रहे हैं ।" उनका यही दुख आज तक मुझे यह सब करने पर मजबूर करता रहा ।

राजन- ऐसा कब हुआ, चलो अब मैं उनको उनके पैसे वापस लेकर मकान दिलवा देता हूं और आगे से कभी कोई उनको शिकायत का मौका नहीं दूंगा।

रमेश भी बोलते हैं बेटा हमसे बहुत बड़ी गलती हुई हैं। रुपया-पैसा असली दहेज नहीं होता। असली दहेज तो लड़की होती है जो अपने साथ अपने संस्कार लेकर हमारे घर आती है और सारी जिंदगी हमारी सेवा करती है । हमसे बहुत बड़ी गलती हुई आगे से इस घर में कभी कोई दहेज की बात नहीं होगी।

चलो हम सब अभी तुम्हारे मम्मी पापा के पास चलते हैं और अपनी की हुई गलती की माफी मांगते हैं।

"किसी ने सच ही कहा हैं, बहू ही दहेज है।"

                    रचनाकार ✍️

                    मधु अरोरा