बुद्धाब्द आम्बेडकर सन शुरु कर मऊ के लाल ने रचा इतिहास

 बुद्ध शरण हंस

मऊ : जनपद में बहुजन कल्याण परिषद/महाबोधि समाज सेवा समिति उ.प्र.माछिल जमीन माछिल घोसी-मऊ द्वारा आयोजित भारतरत्न बाबा साहेब डॉ. आम्बेडकर के जन्मदिन एवं भारतीय नववर्ष बुद्धाब्द 2667 आम्बेडकर सन 131 के पूर्व संध्या पर डॉ. रामविलास भारती द्वारा परिकल्पित एवं निर्मित  भारतीय कैलेण्डर 2067 आम्बेडकर सन (आम्बेडकराब्द) 131 का विमोचन मुख्य अतिथि प्रसिद्ध साहित्यकार, चिन्तक एवं सेवानिवृत्त आई.ए.एस. बुद्धशरण हंस द्वारा सेवानिवृत्त पी.ई.एस. शिवचन्द राम की अध्यक्षता में सिटी मजिस्ट्रेट त्रिभुवन, साहयक शिक्षा निदेशक के.सी.भारती, प्रो.आर.ए. गौतम, डॉ. मुंशी प्रसाद, बीरमेठा, सबिता, आदि की उपस्थिति में भीटी स्थित तमसा वाटिका में किया गया। 

इस अवसर पर "हमारी दिनचर्या में काल गणना एवं कैलेण्डरों की भूमिका: एक विर्मश" विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि बुद्धशरण हंस ने कहा कि डॉ. रामविलास भारती द्वारा निर्मित भारतीय कैलेण्डर बुद्धाब्द आम्बेडकर सन का ऐतिहासिक सांस्कृतिक शुरुआत एक दिन मिल का पत्थर साबित होगा। यह कैलेण्डर खगोलीय घटनाओं, वैज्ञानिक तथ्यों व मानवीय मूल्यों पर आधारित है जिसके अनुसार कोई भी तिथि शुभ अथवा अशुभ नही होता है।बल्कि कोई भी संस्कार, कार्यक्रम कभी किसी समय आपसी सहमति, आमसहमति से सुविधानुसार किया जा सकता है। इसी आधार पर बहुत से लोगों द्वारा बिना लगन, साइत के शादी-विवाह भी होने लगे हैं।साथ ही साथ हमें जाति उन्मूलन का प्रयास भी किया जाना चाहिए, जो नही हो रहा है। जाति मिटाने की चर्चा मंचों एवं साहित्य में तो किया जाता है किन्तु यह व्यवहार में नही दिखता है। हमें इसके लिए मिलकर प्रयास करना होगा। सामान्य व स्वाभिमान के तरीके से जाति का बंधन तोड़ कर विवाह करने वालों की सूची तैयार कर आमजन के बीच उदाहरण पेश किया जाना चाहिए।

 अध्यक्षीय  सम्बोधन में शिवचन्द राम ने बताया कि बुद्धाब्द आम्बेडकर सन मानवतावादी महानायकों, व वैज्ञानिक दृष्टिकोण को ध्यान मे रखकर मूल भारतीयों की नव संस्कृति है। जिससे दुनिया में भारत की विशेष पहचान हुई है। सिटी मजिस्ट्रेट त्रिभुवन ने कहा कि राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए उन समतामूलक संस्कृति को बढ़ावा मिलना चाहिये। के. सी.भारती ने कहा इस कैलेंडर के आधार पर हमे आचरण करना चाहिए। डॉ. भारती ने निश्चय ही एक अंधविश्वास रहित संस्कृति को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाया है। डॉ. मुंशी प्रसाद ने कहा कि डॉ. भारती द्वारा भारतीय कैलेण्डर का निर्माण कर एक नव संस्कृति को जन्म दिया है जो खाशकर बौद्ध संस्कृति को और मजबूत किया है।

 इस ऐतिहासिक पहल ने वैज्ञानिकता व तार्किकता को बढ़ावा देकर बेहतर समाज निर्माण को गति दिया है। प्रो.आर.ए. गौतम ने कहा कि बाबा साहेब डॉ. आम्बेडकर के विचारों को व्यवहार में बदलने के लिए पढ़े, समझें व उसे व्यवहार में लाएं। बीरमेठा ने कहा कि हम सबको मिलकर भारतीय कैलेण्डर बुद्धाब्द आम्बेडकर सन को अपनाते हुए दिनचर्या का इसे आधार बनाना चाहिए। साबिता ने कहा कि महिलाओं को सबसे पहले इसे अपनाकर अपने अन्दर के अंधविश्वास को भागना होगा।

कार्यक्रम के मुख्य आयोजक व भारतीय कैलेण्डर बुद्धाब्द आम्बेडकर सन के निर्माता व संस्थापक डॉ. रामविलास भारती ने कैलेण्डर की विशेषताओं व उपयोगिता पर अपनी बात रखते हुए सभी अतिथियों का स्वागत व आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन लोकतंत्र सेनानी रामअवध राव व रामसेवक राम ने किया। इस अवसर पर मुख्य रूप से सुभाष चन्द, बाबूराम, डॉ. तेजभान, शशांक भारती, कौशल, विनोद, नीलम भारती, बदामी, हरिकेश, सरोज, मनोज, नंदलाल, योगेन्द्र, राजकुमार, अजय, विवेक, रामप्रवेश, विनय, मरछु प्रजापति, ब्रिकेश यादव, आदि उपस्थित रहे।