नारी हो नारीत्व को लाओ

दुष्ट   के   साथ   दुष्टता  दिखाओ ,

तन  पर  अपने  तलवार सजाओ ,

संघर्ष   के  परिणामों   को  सोच 

अपने  को  अयोग्य  मत बनाओ!

नारी    हो   नारीत्व   को   लाओ !


दुराचारियों     से    नाता    तोड़ो ,

अत्याचारों   को    सहना   छोड़ो ,

जो तुझको  नष्ट करने  पर  तुला

उसे उसकी बिसात को दिखाओ!

नारी   हो   नारीत्व   को   लाओ !


तेरे  अश्रू  को   देख   न   सकेगा ,

पर खुद  के  अश्क जरूर देखेगा ,

जो  तुझको बेवजह  ही  सताता

उसे  लानत  का  शिकार बनाओ!

नारी   हो   नारीत्व   को   लाओ !


      ✍️ ज्योति नव्या श्री

       रामगढ़ , झारखंड