महिलायें है देश की उन्नती का आधार उनके प्रति बदलो आपना विचार : नागेन्द्र

किसी भी राष्ट्र समाज के विकास का पैमाना वहां के नारी की सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक विकास के उत्थान को देख कर यह अनुमान लगाया जा सकता है कि वह समाज कितना प्रगतिशील हैं क्योंकि महिला सशक्तीकरण का यह मुख्य आधार ही है कि वो अपने राष्ट्र के विकास में निर्णय निर्माण की प्रक्रिया में कितनी मजबूती से अपना योगदान दे रहीं हैं। 

 दुनिया के अनेकों सामाजिक विद्वानों का यह मानना है कि महिलाएं सामाजिक और प्रशासनिक प्रबंधन मे पुरूषों के अपेक्षा ज्यादा बेहतर तरीके से कार्यो को करने में सक्षम होती है क्योंकि वो अपने सामाजिक जीवन में ईन समस्याओं से निरंतर रूबरू होती रहती है।

भारत के राष्ट्रीय परिदृष्य पर विचार करने पर हमे यह ज्ञात होता है कि वर्तमान में नारियाँ प्रत्येक क्षेत्र में अपना वर्चस्व स्थापित कर रही हैं। शिक्षा एवं आर्थिक स्वतंत्रता ने महिलाओं में नवीन चेतना भर दी है। जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका में वृद्धि हो रही है। आज महिलाएँ राजनीति, बिज़नेस, कला तथा खेल सहित रक्षा क्षेत्र में भी नए आयाम गढ रही हैं। सेना जैसे संवेदनशील क्षेत्र में भी महिलाएँ अपनी भूमिका का पुरुषों के साथ कदम मिलाकर निवर्हन कर रही हैं। वायु सेना मे अवनी चतुर्वेदी सहित तीन लड़कियों को वायुसेना में फाइटर प्लेन उड़ाने की अनुमति प्रदान की गई है साथ ही वर्ष 2020 में सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को सेना की गैर-कॉम्बैट सहायता इकाइयों में महिला अधिकारियों को उनके पुरुष समकक्षों के बराबर स्थायी कमीशन (PC) देने का आदेश दिया

लेकिन यह सशक्तिकरण कुछ क्षेत्र के महिलाओं के विकास के लिए है ना कि यह उन्नती सम्पूर्ण भारत की हैं इसलिये हमे अपवाद मे नहीं बल्कि सम्पूर्ण नारी उत्थान के विकास को राष्ट्रीय पटल पर लाना है। 

भारत में महिलाओं के उत्थान के लिए राज्य और राष्ट्र स्तर पर अनेक पहल किए गए हैं जैसे बिहार सरकार ने पंचायत स्तर पर 50% महिला आरक्षण लागू किया, साथ ही शिक्षक नियोजन मे 50% आरक्षण, सरकारी नौकरियों मे 35% आरक्षण जिस कारण आज पुलिस बल मे महिला की संख्या 25% हो गया है जो भारत मे प्रथम स्थान है। वैसे ही अन्य राज्य सरकारों ने सराहनीय कार्य किया है जैसे मध्य प्रदेश, ओडिशा, तेलांगना, केरल, तमिलनाडु इत्यादि

भारत सरकार के द्वारा महिला सशक्तिकरण के लिए अनेकों प्रयास किए जा रहे हैं जैसे बेटी बचाओ बेटी पढाओ, प्रधान मंत्री उज्वला योजना, सुकन्या समृद्धि योजना, समर्थ योजना, सुरक्षित मातृत्व आश्वासन सुमन योजना इत्यादि।

उपरोक्त मे किए गए अति सराहनीय कार्यो के बाद भी मुझे ऐसा लगता है कि यह प्रयास अभी भी अधूरा है मेरा मानना है कि 49% आबादी का संपूर्ण विकास किए या मुख्य धारा में लाए बिना राष्ट्र को प्रगति के पथ पर नहीं लाया जा सकता है। 

इसलिए सरकारी स्तर पर सभी क्षेत्रों मे 35% आरक्षण को लागू किया जाय साथ ही महिलाओं के समस्या के उचित समाधान के लिए महिला आरक्षण बिल 108वां संविधान संशोधन यथाशीघ्र लागू किया जाय उसमें 33% के जगह 35% किया जाय। 

इसके अलावा सामाजिक मानसिकता मे सुधार की जरूरत है जो आज का समाज महिलाओ को उपभोग की वास्तु समझता है उसे अबला समझता है अपनी पुरुषवादी श्रेष्ठता को उनपर थोपना चाहता है इसमे परिवर्तन की जरूरत है कुछ अन्य सुधार जैसे, कार्य क्षेत्र में शारीरिक शोषण पर लगाम के लिए विशाखा निर्देश को सख्ती से लागू किया जाय, समान कार्य के लिए समान वेतन असंगठित क्षेत्र के लिए लागू हो महिलाओं के प्रति होने वाले अपराधों का निवारण त्वरित और सत्यनिष्ठा से किया जाय केवल खानापूर्ति ना हो। 

अंत मे मैं यही कहना चाहता हूं कि भारतीय समाज को महिलाओं के प्रति अपने अपने नकारत्मक विचार को त्याग कर सकारात्मक सोच अपनाने की आवश्यकता है तभी हम एक सामाजिक और सांस्कृतिक अर्थिक और राजनीतिक स्तर से मजबूत राष्ट्र का निर्माण कर पायेंगे। 

यह लेखक के आपने विचार है। 

लेखक: 

 प्रखंड अल्पसंख्यक कल्याण पदाधिकारी 

 पश्चिम चंपारण

9555891524