जय यमदेव

नीली आकृति आपकी, सवारी आपकी भैंस है। बच्चे कतिला अस्त्र दंड है, मृत्यु के देवता आप यम हैँ।

 दक्षिण दिगपाल हैँ आप, मरने पर व्यक्ति जाता आपके पास।

 स्मृतियों में यम के चौदह नाम हैँ, तर्पण में तीन अंजलि देना सबको जल है।

  माता संज्ञा पुत्री विश्वकर्मा को था शाप, अतः यम यति चंचल बने।

 पुण्य आत्माओं को विष्णु समान हैँ, दक्षिण द्वार वालों को तप्त लौह द्वार हैँ।

 पुण्य आत्माओं  को बिल्कुल  नहीं डराते, बाकी को भयंकर रूप दिखाते हैँ।

आपका कर्म व्यक्ति को दंड देना है, दंड द्वारा उसे शुद्ध करना है।

 दीपावली पर यमदीप  दिया जाता है, बाकी त्योहारों पर नमन किया जाता है।

 आपकी आराधना गुणकारी है, आपसे डर मूर्खता बड़ी भारी है।

आप हमेशा शुभ कर्म चाहते हैँ, बुरा देख आप कुटिल हो जाते हैँ।

 जैसा आपके बारे में सोचते हैँ, आप बेवजह नहीं सताते हैँ।

 सावित्री लड़ी थी आपसे,  दिए वरदान और वे सच किये।

कर्मो के अनुरूप ही फल देते हैँ, आपके रूप को देख सब भय खाते हैँ।

 हे मृत्यु के देवता ऐसा क्यों, औसत आयु कम क्यों हुई है।

 कुछ तो दया करो यम देव जी, कोरोना से किसी को मत बुलाओ जी।

यह तो अन्याय है मानव के साथ, सब पर  अपनी  दिखाओ  दया दृष्टि।

 हाथ जोड़ आँखों में अश्रु लिए, करूँ प्रार्थना यूँ किसी को उठाओ न।

नीली आकृति आपकी, सवारी आपकी भैंस है।            

जय यम देव

पूनम  पाठक "बदायूँ "

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