अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर रुपया

नई दिल्ली : अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल से आयातित मुद्रास्फीति, व्यापार और चालू खाता घाटा बढ़ने की आशंका के बीच भारतीय रुपया आज शुरुआती कारोबार में अब तक के निचले स्तर पर पहुंच गया। आंशिक रूप से परिवर्तनीय रुपया 76.96 को छूने के बाद 76.92 पर कारोबार कर रहा है, यह अब तक का सबसे कमजोर स्तर है। शुक्रवार को यह 76.16 बजे बंद हुआ था। बेंचमार्क 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड 6.86% पर कारोबार कर रहा था।

भारत कच्चे तेल का दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा आयातक है, और बढ़ती कीमतों से रुपये को भी नुकसान होता है। संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय सहयोगियों द्वारा रूसी तेल आयात प्रतिबंध पर विचार करने के बाद सोमवार को 2008 के बाद से तेल की कीमतों में 6% से अधिक की वृद्धि हुई है। भारतीय शेयरों में आज 2.5% से अधिक की गिरावट आई, निवेशकों ने जोखिम भरी संपत्ति को डंप किया है।

सीआर फॉरेक्स सलाहकारों ने एक नोट में कहा है कि रुपए में अस्थिरता अधिक रहने की संभावना है।वैश्विक बिकवाली के कारण FII ने रुपये से अधिक की निकासी की है, इस कारण स्थानीय इक्विटी में 2% से अधिक की गिरावट आई है। एफआईआई मार्च में अब तक 16,800 करोड़ रुपये का स्टॉक निकाल चुके हैं। नोट में कहा गया हैं, बैंकर का बैंक- आरबीआई ऋणदाता के अंतिम उपाय के रूप में कार्य करता है और उनका हस्तक्षेप केवल "दुबते को तिनके का सहारा" हो सकता है। कुल मिलाकर, सुनामी पहले ही आ चुकी है और पांच प्रमुख कारक- तेल, इक्विटी में बिकवाली, भू-राजनीतिक तनाव, मजबूत डॉलर और राज्य के चुनाव परिणाम रुपये में बड़ी उलटफेर कर सकते हैं।

जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार का कहना हैं, “युद्ध से उत्पन्न असाधारण अनिश्चितता ने कमोडिटी बाजारों को उथल-पुथल में धकेल दिया है। 128 डॉलर पर क्रूड एक बड़ा झटका है। यह वैश्विक विकास को प्रभावित कर सकता है और मुद्रास्फीति के दबाव को बढ़ा सकता है। इससे  भारत में, विकास कम होगा और वित्त वर्ष 23 के लिए मुद्रास्फीति अनुमान से अधिक होगी।