मानो सच भगवान तुम, यारों इस रोटी को


करो नहीं बर्बाद तुम , ऐसे इस रोटी को।

मानो सच भगवान तुम, यारों इस रोटी को।।

करो नहीं बर्बाद तुम-------------------------।।


इतनी मेहनत यह इंसान, करता है किसके लिए।

इतनी दुहायें ईश्वर से हम , करते हैं किसके लिए।।

कोई मजदूरी, नौकरी, कोई करता है व्यापार।

करता है कोई व्याभिचार, रोटी यह पाने के लिए।।

करो नहीं बर्बाद तुम--------------------------------।।


हर किसी की जान बसी है , यारों इस रोटी में।

बहुत ताकत - इज्ज़त है , यारों इस रोटी में।।

दुनिया में होते हैं युद्ध, यारों रोटी के लिए।

टूट जाते हैं रिश्तें भी , यारों इस रोटी में।।

करो नहीं बर्बाद तुम---------------------------।।


बनता है कोई भिखारी , पाने को यह रोटी।

करता है कोई चोरी- हत्या, पाने को यह रोटी।।

बेच देता है ईमान- धर्म, रोटी के लिए इंसान।

तड़पता है जीने के लिए, पाने को यह रोटी।।

करो नहीं बर्बाद तुम--------------------------।।


साहित्यकार एवं शिक्षक-

गुरुदीन वर्मा उर्फ जी.आज़ाद

तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)

मोबाईल नम्बर- 9571070847