आवाज के साथ पहचान उपकरणों की दोस्ती

संगीत सागर की तरह अंतहीन है। आप जितनी गहराई में जाते हैं, उतनी ही नई चीजें खोजते हैं। शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति मिले जिसे संगीत पसंद न हो और जिसका इससे कोई लेना-देना न हो। आप जहां भी गानों की आवाज सुनते हैं, आपके कान तुरंत उस राग को पकड़ लेते हैं। संगीत जीवन के हर मोड़ और क्षण में हमारा साथ देता है। डिप्रेशन और तनाव पर काबू पाने में संगीत अहम भूमिका निभाता है।  हर पल सुख-दुख में संगीत हमारा साथ देता है। जन्म से मृत्यु तक मनुष्य के साथ संगीत है।  संगीत को जीवन का सच्चा साथी कहने में कोई हर्ज नहीं है, संसार में संगीत की उत्पत्ति ध्वनि की उत्पत्ति से ही हुई है।

           संगीत का हर धर्म में बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। संगीत किसी भी पूजा-अर्चना का आधार होता है। मंदिर में आरती के दौरान विशेष रूप से घंटियों का बजना शुरू हो जाता है। आरती एक राग में कहा जाता है। इतना ही नहीं पूजा के दौरान तालियों की ताल भी एक होती है।  संगीत का जन्म शब्दों के बनने से पहले हुआ है। यह कहना सुरक्षित है कि संगीत मानव जीवन का एक अभिन्न अंग है।

                जिस वाद्य यंत्र से यह संगीत बनाया जाता है उसे टी कहते हैं। वी ऊपर या किसी संगीत समारोह में या स्कूल की प्रार्थना, कार्यक्रम में।  भारतीय वाद्ययंत्रों की परंपरा पुरानी है। जैसे-जैसे समय बदला, भारतीय संगीत की धारा में नए वाद्ययंत्रों ने प्रवेश किया।  ढोलकी, बाँसुरी, तबला और ताल के अलावा बाक़ी वाद्यों की पहचान बहुत अच्छी है।  तंबोरा, पेटी, तबला, सारंगी, वीणा, सतर, बांसुरी, संतूर, मृदंग, सरोद, ढोलकी, वायलिन, सनाई-चौघड़ा, गिटार, मेंडोलिन, मुख अंग, पियानो, जल तरंग, वाद्य, सिंथेसाइज़र जैसे महत्वपूर्ण वाद्य यंत्र दिए गए हैं। नई पीढ़ी ड्रम, बैंजो जैसे वाद्ययंत्रों की ओर आकर्षित होती है 

डीके बारुपाल 

सीतली (बाड़मेर) राजस्थान।