कृष्ण-सुदामा प्रसंग से श्रोता हुए भाव विभोर

बांदा। महाशिवरात्रि के पावन पर्व के पूर्व से श्रीभूतेश्वर शंकर जी में श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन कथावाचक आनंदकृष्ण शास्त्री ने श्रोताओं को भगवान श्रीकृष्ण व गोपियों के प्रसंग को सुनाया। उन्होंने कहा कि जब श्रीकृष्ण ने वंशी बजाई तो गोपियों को ऐसा प्रतीत होने लगा कि भगवान कृष्ण वंशी के माध्यम से हमारा नाम लेकर पुकार रहे हैं। गोपी जिस कार्य को कर रही थी उस कार्य को छोड़कर गोविंद के पास जाने लगी। गोविंद ने सभी का स्वागत किया। इसी तरह भगवान भी अपने भक्तों के पीछे दौड़े चले जाते हैं अगर उन्हें प्रेम से पुकारो। भगवान की कंस वध लीला, रुक्मणी विवाह, सुदामा चरित्र में बताया कि भगवान ने सुदामा की मित्रता कैसे निभाई। मित्र हो तो श्रीकृष्ण-सुदामा जैसे। भगवान श्रीकृष्ण-सुदामा मित्रता के लिए सब कुछ अर्पण कर दिया यह है असली पहचान। महाशिवरात्रि के दिन श्रीभूतेश्वर शंकर जी महाराज रुद्राभिषेक एवं शिव बारात गांव में भ्रमण करेगी। आयोजकों में सुरेशदास महाराज, सौरभ त्रिवेदी, मारकांडेय त्रिपाठी, दीपू मिश्रा, विवेक तिवारी, राधारमण मोनू तिवारी आदि मौजूद रहे।