फूलों की छतरी

बचपन फूलों की छतरियो में बिता,

एक एक यादें कलियों सी खिलती रही है,

जवानी काटों में बिता,

फिर भी हर एक मोड़ पर मुस्कुराती रही

फूलों की छतरी महकती रही

चुन चुन सपने खोते रहे

रंग - बिरांगी यादें बनती गई

बुढ़ापा चारपाई में बिता।

यादें का बगीचा खिलता गया


प्रतिभा जैन

टीकमगढ़ मध्य प्रदेश