रिश्तों की दरार

हमेशा रिश्तों को बचाने का,

प्रयास करना चाहिए 

प्रकृति भी एकता,

और प्रेम चाहती है                        

  चाँद को अहसास है,

चांदनी के जाने का         

      बादलों को अहसास है,

 बरसात के जाने का                      

  सूरज महसूस करता है,

किरणों की दूरी को                     

  फूलों को भी कसक होती,

महक जाने की                  

      दूरियां भी याद करती,

 नजदीकियों को                     

      रिश्तों मे पड़ी दरार,

दूर नहीं हो पाती             

        बाकी सब आना जाना है,

प्रकृति का नियम पुराना है

 दिलों को मत तोड़िये,

 शीशे की तरह                            

       इंसान मे इंसान तलाशिए,

पूजते पत्थर की तरह              

    न कोई अपना पराया है,

मेरा मेरा नहीं -तेरा तेरा नहीं

  खाली हाथ आये यहाँ,

 क्या लेके यहाँ से जाना है 

फूलों से शब्द बिखराओ,

 यहाँ वहाँ जहाँ तहाँ

पूनम पाठक "बदायूँ "   

 इस्लामनगर बदायूँ उत्तर प्रदेश