ईश्वर की मर्ज़ी!

गौरव मोज़े पहनते हुए कहने लगा, बहुत दिनों से सुधा की कोई खबर नहीं आई,..मैं फोन लगाता हूं, तो रिसीव नहीं करती है....पता नहीं क्या बात है,.....मैं सोचता हूं इस बार राखी में हम दोनों ही चलते हैं उसके घर!"

रेनू ने कहा, पर कैसे जाएं मुझे ऑफिस से छुट्टी नहीं मिल रही, तुम ही चले जाना!"

गौरव ने चुटकी लेते हुए कहा, "हां सारा दिन ऑफिस से सिर्फ अपनी बहन से बातें करती रहती हो,..सुधा से तुम्हें क्या लेना,... वो तो मेरी बहन है न! ठीक है मैं ही चला जाऊंगा!"

रेनू,"अच्छा चलो लेट हो रही है...बच्चों को भी छोड़ना है स्कूल!" 

शाम को गौरव घर लौटा तो चौंक गया,सुधा का लटका हुआ चेहरा देखकर। 

 गौरव ने कहा,"सुधा तुम अचानक इतने दिनों से कोई खबर भी नहीं तुम्हारी....और मैं जब भी फोन करता हूँ,,...तो तुम रिसीव भी नहीं कर रही थी...मैं सोचा कि तुम ससुराल में व्यस्त हो!"

सुधा गौरव से लिपट कर फफक कर रो पड़ी। 

तभी रेनू कमरे से बाहर आई, रेनू के साथ उसकी बहन रीना भी थी।

गौरव ने रीना को देख कर कहा, 

"मेरी बहन आई है तो तुमने अपनी बहन को बुला लिया...तुम औरतों को समझना मुश्किल है!"

तब सुधा ने कहा, "भैया मुझे रोहित बहुत ही परेशान कर रहे थे, रोज रात को पीकर आते और मुझसे झगड़ा करते और मारपीट भी करते थे....और आपसे पैसा मंगवाने के लिए कहते....मैंने दो बार मंगवाया भी था...भाभी ने ही भेजे हैं पैसे! 

मुझे आप लोगों से फोन में हर वक्त बात भी नहीं करने देते थे, ..उनके घरवाले कुछ नहीं कह रहे थे...मैं बहुत दुखी और परेशान थी! एक दिन माँ जी की तबीयत अचानक खराब हुई....दोनों मां-बेटे अस्पताल गए...तो मैंने मौके का फायदा उठाया और भाभी को सारी बात बता दी !

भाभी ने ही अपनी बहन रीना को मेरे यहां भेजा और वो मुझे और पिंकी को यहां लेकर आई! 

दरअसल पिंकी के होने के बाद मां जी मुझसे खुश नहीं थी....और रोहित का अत्याचार बढ़ गया था....आज मैं यहां हूं तो भाभी की वजह से ....मां हमारे साथ नहीं है, आज अगर माँ भी होती, तो शायद यही करती भैया! जो भाभी ने किया!

आज मां की जगह भाभी ने ले लिया है, 

आज से मैं भाभी को भाभी मां कहूंगी!"

गौरव आंखों में आंसू लिए कृतज्ञता से रेनू को देखने लगा। 

रेनू सुधा के पास आकर उसका माथा चूमते हुए बोली, "सुधा आज से तुम यहीं रहोगी,....तुम पढ़ी लिखी हो ....मैं ऑफिस में बात कर तुम्हें वहां नौकरी दिलवाने का प्रयास करूंगी! 

ये तुम्हारा ही घर है हम तुम्हारे साथ हैं.....और आगे ईश्ववर की मर्जी़!" ईश्वर की मर्जी़ के बगैर दुनिया में कुछ नहीं होता! 

स्वरचित अनामिका मिश्रा 

झारखंड जमशेदपुर