श्रीमद् भागवत कथा श्रवण से मनुष्य को प्रेत योनि से मुक्ति -अतुल जी महाराज

मनकापुर (गोंडा ) । शास्त्री नगर स्टेट बैंक के बगल चल रहे श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन कथा व्यास पूज्य श्री अतुल जी महाराज ने धुंधकारी की कथा का वर्णन करते हुए कहा- धुंधकारी बहुत बड़ा पापी था जो मरने के बाद शैतान रूप में आया उसके भाई गोकर्ण ने उसके प्रेत योनि से उबारने के लिए श्रीमद् भागवत कथा का अनुष्ठान किया। जिससे धुंधकारी को मोक्ष प्राप्त हुआ। कथा में उन्होंने कहा द्वारकाधीश को जब दुर्योधन हस्तिनापुर में आमंत्रित करता है, तो भगवान के लाख कोशिश के बाद भी दुर्योधन पांडवों को सुई के नोक बराबर भी जमीन देने को तैयार नहीं होता है।

इससे भगवान क्रोधित होकर दुर्योधन के घर का भोजन त्याग कर विदुर के घर पहुंच कर भोजन करते हैं। भगवान नारायण कभी भी अहंकार जनित कोई भी है प्रिय नहीं है चाहे जब उसके बदले में क्यों ना ईश्वर को छप्पन भोग ही ना अर्पित करें परंतु प्रेम से एवं निश्चल भाव से समर्पित नारायण एक लोटा जल एवं साग भाजी से भी प्रसन्न हो जाते हैं जिसका उदाहरण उन्होंने दुर्योधन के घर मेवा त्यागो साग विदुर घर खायो कौरवों से 5 गांव मांगने आए थे पांडवों के लिए जो धर्म का साथ दे रहे थे परंतु कौरवों के ना कहने पर पांडवो के अपार भक्ति एवं श्रद्धा निष्छलता को देखते हुए भगवान श्रीकृष्ण ने उनको हस्तिनापुर का दोबारा राजतिलक करवा दिया कथा में श्रोताओं की अपार भीड़ पहुंच रही है।