चंद्रोदय मंदिर में गौर पूर्णीमा महामहोत्सव 18 को

मथुरा।ब्रज की होली विश्व विख्यात है। यहां की लड्डू होली, लठामार, छड़ीमार होली एवं हुरंगा यह सभी ब्रज की होली के अलग-अलग आयाम हैं। गौड़ीया वैष्णव के संतों द्वारा इस होली उत्सव को भगवान श्रीकृष्ण के प्रेमावतार श्री चैतन्य महाप्रभु के अवतरण दिवस के रूप में मनाया जाता है। चंद्रोदय मंदिर में गौर पूर्णिमा महामहोत्सव 18 मार्च शुक्रवार को चंद्रोदय मंदिर प्रांगण में आयोजित किया जा रहा है।

सभी प्राणियों में स्नेह भाव रखने वाले श्री चैतन्य महाप्रभु ने विलुप्त हो चुके द्वापर युगीन वृन्दावन को मध्यकालीन कराल काल में पुनर्जीवित किया (बसाया) था। श्री चैतन्य महाप्रभु का जन्म 15वीं शताब्दी में फाल्गुन शुक्लपक्ष की पूर्णिमा के दिन पिता जगन्नाथ मिश्र एवं माता शची देवी की संतान के रूप में पश्चिम बंगाल के मायापुर (उस समय का नवद्वीप) नामक गांव में हुआ था। नीम के वृक्ष के नीचे जन्म होने जन्म होने के कारण माता-पिता ने उनका नाम निमाई रखा। हालांकि गौरवर्णी होने के कारण वे गौरांग, गौर हरि एवं गौर सुन्दर के नाम से भी सम्बोधित किये जाते हैं।

चंद्रोदय मंदिर के मीडिया प्रभारी अभिषेक मिश्रा ने बताया कि महाप्रभु ने हरिनाम संकीर्तन की पावन रसधारा को बहाकर क्षुधित, पीड़ित एवं प्रताड़ित मानवता की प्रभु-प्रेम पिपासा पूर्ण की। उन्होंने बताया कि आगामी 18 मार्च को मंदिर के भक्तों द्वारा श्री चैतन्य महाप्रभु के अवतरण दिवस को गौर पूर्णिमा महामहोत्सव के रूप में मनाया जाएगा।इस अवसर पर विशेष रूप से तैयार किये गए नवीन वस्त्र को श्रीश्री राधा वृन्दावन चंद्र को धारण कराया जाऐंगा। इसी श्रृंखला में भक्तों द्वारा अपने आराध्य के समक्ष 56 भोग, झुलन उत्सव, शोभायात्रा, भजन संध्या, फूलों की होली  का भव्य एवं दिव्य आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम में सम्मिलित होने के लिए भारत के विभिन्न प्रांतों से भक्तगण वृन्दावन पहुंच रहे हैं।