लोहड़ी का पर्व!

फसल की कटाई और बुआई के तौर पर मनाया जाता है यह त्योहार,

सब नए नए वस्त्र पहनकर, संध्याकाल में  हो जाते है तैयार,

किसान उत्सव के रूप में लोहड़ी का पर्व मनाते,

आग जलाकर सभी, आग के चारों ओर एकत्र हो जाते!


सब मिलकर आग की परिक्रमा करते ,

ढोल की थाप के साथ गिद्दा और भांगड़ा नृत्य विशेष आकर्षण का केंद्र होते,

पंजाब की शान में चार चांद लगाने वाला यह पर्व,

उत्तर भारत में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है यह उत्सव!


सभी मिलकर आग में गुड़, तिल, रेवड़ी, गजक डालते,

आग के इर्द-गिर्द नाचते-गाते और खुशियां मनाते,

पॉपकॉर्न और तिल के लड्डू भी एक दूसरे को बांटते,

आग के पास घेरा बनाकर दुल्ला भट्टी की कहानी सुनाते!


लोकगीत गाकर लकड़ी और उपले करते हैं इकट्ठे,

हर्षोल्लास के साथ, सभी एक दूसरे से गले मिलते,

इस त्यौहार का उद्देश्य है, आपसी एकता बढ़ाना,

इस त्यौहार में, बनता है, मक्का की रोटी, सरसों का साग और बहुत सारा स्वादिष्ट खाना!


चलो हम सब भी मिलकर बनाएं लोहड़ी,

आग में डालें मूंगफली, खील, मक्की के दाने और रेवड़ी,

ले हम भी, इस उत्सव में भाग,

खाए सब मिलकर गज्जक, मूंगफली,मक्का की रोटी और सरसों का साग !!


डॉ. माध्वी बोरसे!

राजस्थान (रावतभाटा)