------ तीखा तीर -------

दिन ,महीने, साल गुजरते जायेंगे 

ना  जाने  अच्छे दिन कब आयेंगे 

सपने  तो  दिखा  दिये  थे  हजार 

पर  कब खुसियों  के दिन आयेंगे 

फिर चुनाव और वादों की सौगात 

क्या वोटरों को  फिर से  रिझायेंगे 

------  वीरेन्द्र  तोमर