गूँजती चीखें

एक चीख!सुनाई देती है कानों में

है अंधेरा आज भी नारी के जीवन में

लड़की होना कोई पाप तो नहीं?

क्यों झुकना पड़ता है उसे हर कहीं।


'पुरूष'क्या ये है संसार में बड़ा!

जो बात-बात पर नारी से लड़ा।

है समझता ये खुद को बहुत बड़ा

जो माँ-बहनों पर रखता पहरा कड़ा।


गूँजेगी वो चीखें उसके भी कानों में

न सो पाएगा और न ही जग पाएगा

होगा सृष्टि का उत्थान फिर से

नारी लेगी काली का रूप फिर से।


मिट जाएगा अहंकार पुरूष का

होगा चूर-चूर अहं अब उसका

सीता और सती जैसी नारी भी

दे गई अग्नि परीक्षाएँ कई।


अब नहीं गूँजेगी चीखें नारी की

जागेगा अब नारी का हृदय

हे पुरूष!अब माननी होगी हार तुझे

छोड़ेगी अब नारी हर हाल में पीछे तुझे।


परिचय - नीतू कुमारी पुत्री मनीराम

मु.पो.कसेरू,जिला -झुंझुनूं,राज.