------- तीखा तीर ------

चुस  लिय़ा  रस गन्ने  के  जैसा 

फेंक  दिया  समझ  के  छिलका 

जो  करते  थे   कर   की  चोरी 

उनको  अब  मिल  रहा तडका 

छोटे  ब्यापारी  बर्बाद  हो  गये 

देकर उनको जीएसटी का पैसा 

जब  लेना  ही जीएसटी  उनसे 

क्यूँ  दिया जीएसटी का   पैसा 

----- वीरेन्द्र  तोमर