अनुराग

लघु मिथक इस जीवन का विस्तार है अनुराग,

सघन प्रेम से स्पंदित उर का आधार है अनुराग।


उष्णता से घिरकर भी दीपक संग मंडराना,

उसकी लौ में शलभ का मर जाना है अनुराग।


विष पीकर भी कान्हा भक्ति में श्वास लेना,

व्रण को ढाल बना,मीरा का विश्वास है अनुराग।


मकरंद  के मोहपाश में रहता हर पल मधुप,

कलियों की जकड़न में भी गुँजन,है अनुराग।


सबको प्यासा रखे जो क्षारयुक्त मौन समुन्दर,

उसमें मीठी चंचला नदियों का मिल जाना है अनुराग।


ढुलकते एक अश्रुकण,कर देते विह्वल माँ का हृदय,

बच्चों में अपनी दुनियां तलाशना है अनुराग।


सौंधी माटी का अंकुरणकर्ता बन जाना,

बीजों से वृक्ष बना, कनक उपजाना है अनुराग।


अजनबी संग इक डोर में बँध जाना,

सात वचन की लाज निभाना है अनुराग।


आखर आखर को कवि द्वारा लयबद्ध करना,

शब्दों के मायाजाल में उलझना है अनुराग।


                       रीमा सिन्हा

                   लखनऊ-उत्तर प्रदेश