॥ खुशियों से तड़ीपार ॥

मत कर गरीबों पर अत्याचार

खुशियों से हो जाओगे तड़ीपार

अर्श से फर्श पर आ जाओगे

जब कोई गरीब को रूलाओगे


मत कर गरीब पर कोई अन्याय

निश्चित ही पाओगे रब से न्याय

मुसीबत की उपहार हाथ आयेगी

अश्कों की सैलाब बहा ले जायेगी


मत कर गरीबों को परेशान

धुमिल पड़ जायेगी तेरी शान

महल खंडहर में बदल जायेगा

शीश महल टुट ढह जायेगा


मत कर गरीबों का शोषण आप

नसीब से रूठ जायेगी तेरी ताज

आह की तपिश जला जायेगा

रसूख कोई काम ना दे पायेगा


मत कर गरीब का व्यापार

निकल जायेगा हाथ से घर द्वार

दर दर की ठोकरें खाओगे

जब किसी गरीब को तड़पाओगे


मत कर गरीबों का संहार

निश्चित हो जायेगी तेरी हार

रंग महल बन जायेगा श्मशान

लुट जायेगी तेरी ये जहान


उदय किशोर साह

मो० पो० जयपुर जिला बाँका बिहार

9546115088