तपस्या करने वाले को यदि मिली तरजीह तो ढह सकता है भाजपा का किला

अनिल श्रीवास्तव/अखिलेश अग्रहरी

मांग की गुफा में सो रहा है शेर जिस दिन जागेगा उस दिन विपक्ष हो सकता है ढेर

यदि जनता ने परिवर्तन करने पर कर लिया अमल तो मुश्किल में पड़ सकता है कमल

अगर तपस्या का मिला फल तो जीत का निकलेगा हल- बुद्धू

फतेहपुर। खागा विधानसभा में आगामी विधानसभा में जीत का परचम लहराने के लिए समाजवादी पार्टी के कई संभावित प्रत्याशियों ने जबरदस्त बिगुल भूख रखा है और जनता के बीच जाकर पार्टी की नीतियों का बखान करते नहीं थक रहे हैं। किंतु खागा विधानसभा से पिछले 2012 से ताल्लुक रखने वाले और लगातार जनता के बीच में बने रहने वाले बुद्धू पासी का चेहरा बच्चा-बच्चा जानता है क्योंकि बुद्धू पासी इस विधानसभा में पार्टी को मजबूत करने के लिए 2012 से अलख जगाते चले आ रहे हैं और वह इस विधानसभा में परिचय के मोहताज नहीं है। कड़ी मेहनत और अच्छी लगन को देखते हुए यदि पार्टी हाईकमान ने बुद्धू पासी को तरजीह दिया तो भाजपा विधायक कृष्णा पासवान को जीत हासिल करने के लिए लोहे के चने चबाने पड़ सकते हैं। हैरत की बात तो यह है कि जो विभिन्न राजनैतिक दलों को छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल हुए हैं यदि पार्टी हाईकमान उनकी तरफ रुख करती है तो जो पिछले काफी समय से पार्टी को मजबूती प्रदान करने की तपस्या करते चले आ रहे है यदि उन चेहरों पर विचार नहीं किया गया तो या फिर उनकी तपस्या में कमी साबित होगी या फिर पार्टी हाईकमान में। इस विधानसभा में सपा का एक शेर मांद में सो रहा है किंतु चुनावी समर भूमि में जागने के बाद उस शेर की भूमिका बहुत अहम होगी। हालांकि खागा विधानसभा में समाजवादी पार्टी के सभी संभावित प्रत्याशी गांव गांव जाकर तूफानी दौरा कर रहे हैं किंतु इस विधानसभा में संभावित प्रत्याशियों में से सबसे मजबूत चेहरा जनता के बीच बुद्धू पासी का है लेकिन निर्णय लेना तो पार्टी हाईकमान को है।