"शहीद के घर का पता"

बहुत समय पहले की बात है, अपने देश की आन-बान शान के लिए, दुश्मनों से लोहा लेते हुए सीमा पर एक कैप्टन तेजवीर सिंह शहीद हो गया।

यह उस समय की बात है जब तक घर-घर में फोन नहीं थे।फोन का आविष्कार हुआ ही था, पर आम जनता से फोन दूर थे। हमारे देश का राजा बहुत बुद्धिमान था,उसे बड़ा दुःख हुआ, कैप्टन के शहीद होने की खबर ने उसे अंदर तक झकझोर दिया।उसी समय मन में विचार आया कि,देखता हूँ, मेरे देश की जनता का,देश के शहीद नौजवानों के प्रति क्या भावनाएँ हैं। क्या जिस तरह से मैं विचलित हुआ हूँ,उसी तरह मेरे देश वासियों का तन मन इस शहीद के लिए रोयेगा। यह सोचकर राजा ने पूरे देश में संदेश भेज दिया "कि एक माँ का लाल शहीद हुआ है।परन्तु पता नहीं चल पा रहा कि वह किस मां का सपूत है। अर्थात्-उसका घर कहां है, उसके माता-पिता व पत्नी कौन है। मैं, मां भारती के इस लाल का चरण वंदन करता हूँ और सैल्यूट करता हूँ। कुछ सैनिकों के साथ इस अमर शहीद को इसके घर भेज रहा हूँ, कृपया इसके घर का पता इन सैनिकों को बता देना।"

यह कहते हुए राजा ने पाँच सैनिक दलों के साथ अमर शहीद तेजवीर सिंह के पार्थिव शरीर को भेज दिया, और नौजवानों को आदेश दिया कि, इसके असली माता पिता व पत्नी की पहचान करके ही उन्हें सोंपना,हर कोई इसे अपना लाल बताएगा। और ऐसा ही हुआ---

सैनिकों ने बड़ी गाड़ी में ऊँचाई पर सह सम्मान तिरंगा में लपेटकर और अपने कांधे पर रखकर धीरे-धीरे चल दिए।साथ में लाउडस्पीकर पर कुछ सैनिक भारत माता की जय! 

अमर शहीद तेजवीर सिंह की जय! मां भारती के लाल की जय!

इस तरह बोलते जा रहे थे। आगे-आगे कुछ सैनिक तेजवीर सिंह के घर का पता पूछते हुए आगे बढ़ते जा रहे थे। जिस रास्ते से अमर शहीद की यात्रा निकल रही थी,उस रास्ते में घर घर से निकलकर सभी लोग अमर शहीद के साथ हो लिए। जिससे भी सैनिक तेजवीर सिंह के घर का पता पूछते,वही कहता-कि यह हमारा लाल है,अरे ये तो हमारा बेटा है, ये तो हमारे गांव का सपूत है। रोते-रोते उसके पीछे-पीछे चल देते। तेजवीर सिंह की शहादत पर हर कोई आँसू बहा रहा था। सभी उसका माता पिता होने का दावा कर अपने आप को गर्वित महसूस कर रहे थे।ऐसा लग रहा था कि पूरा देश उसके पीछे-पीछे चल रहा है। कुछ लोगों में यह उत्सुकता थी कि आखिर यह किसका लाल शहीद हुआ है।

कुछ बुजुर्ग यह सोचकर आंसू बहा रहे थे कि ये सैनिक मेरा बेटा इसे मान लें तो, मैं धन्य हो जाऊंगा।इस जीवन के सभी पाप धुल जायेंगे और परलोक भी सुधर जायेगा। माताएँ आँचल फैला-फैलाकर कह रही थी कि, यह हमारा लाला है। ऐसे में सैनिकों को बड़ी परेशानी हो रही थी, आखिर इसके असली माता पिता कौन हैं।उनको पहचान ना बड़ा मुश्किल हो रहा था। सुबह से शाम हो गई पर असली घर का पता नहीं मिला।सैनिक तेजवीर सिंह का फोटो द्वार-द्वार जाकर दिखाते, और सारी इन्क्वायरी करते फिर आगे बढ़ जाते।थक हार कर सैनिकों ने एक चौड़े से मैदान में गाड़ी को रोक लिया और तेजवीर सिंह के पार्थिव शरीर को उन्होंने एक ऊंचे स्थान पर रख दिया, और पूरे नगर में पता करने लगे। जहाँ-जहाँ जाते वहाँ से लोग उस मैदान की ओर दौड़ने लगते, कुछ ही समय में पूरा मैदान भर गया। वहाँ की जनता का शैलाब उमड़ पड़ा। वहाँ हर बूढ़ी माँ रो रही थी, सभी की आँखों में आँसू थे, सैनिक पहचान नहीं पा रहे थे कि असली माता पिता कौन हैं। यह सूचना राजा के पास भेजी गई, और सभी स्थिति की जानकारी दी।

तभी राजा ने कहा--

मैं जानता था कि, असली घर का पता लगाना बड़ा मुश्किल होगा। राजा ने अपने बुद्धि-विवेक से कहा---

हे! सैनिकों जिस घर से बूढ़ी माँ निकले और फोटो को देखकर, इस खबर को सुनकर उसकी आँखों से आँसू न निकलें, परन्तु आँचल से दूध की धार निकले बस वही इसकी असली मांँ होगी।

हे! सैनिकों जो बूढ़ा बाप फोटो देखकर,इस खबर को सुनकर पछाड़ खाकर गिर पड़े और उससे फिर उठा न जाए, वही इसका असली पिता है।

हे! सैनिकों जो महिला फोटो देखते ही तुमसे फोटो को छुड़ाकर अपने सीने से लगा ले और फोटो देखते ही अपनी सभी चूड़ियां फोड़ दे, वहीं इसकी असली पत्नी है।

अर्थात- उन्हीं को इसका पार्थिव शरीर सोंप देना। सैनिक राजा की बात बडे़ ध्यान से सुनकर आ गये । अमर शहीद तेजवीर सिंह को आकर देखा तो मैदान में ऐसा लग रहा कि पूरा देश इस वीर को विदा करने आया है।आज नगर में किसी के यहाँ चूल्हा नहीं जला है। सभी के आँसू कह रहे थे,पूछ रहे थे,कब तक इस तरह हमारे लाल सीमा पर शहीद होते रहेंगे।वे राजा से कहना चाहते थे कि कोई ठोस कदम उठाया जाए। मां भारती के सपूतों की रक्षा के लिए।

सैनिकों ने ढूंढते-ढूंढते शहीद के असली घर का पता लगा लिया, और राजा के आदेश अनुसार अमर शहीद तेजवीर सिंह के माता- पिता को उसका पार्थिव शरीर सोंप दिया।

सैनिकों ने राजा के पास आकर पूरा हाल कह सुनाया, सभी सैनिकों ने आश्चर्य से कहा--

हे!राजन सचमुच अपने लाल को देखकर उस बूढ़ी मां के आँचल से दूध उतर आया था, तथा बूढ़ा बाप पछाड़ खाकर गिर गया था फिर उससे उठा नहीं गया। और उसकी पत्नी ने फोटो को पहचान कर हमसे छुड़ाकर सीने से लगा लिया था, फिर किसी को नहीं दिया, कभी उस फोटो को मुंह से चिपकाती, कुछ ही पल में फोटो आँसुओं से तलवतल हो गया,वह पागल सी हो गई,रो रोकर कह रही थी, कहां है मेरी नैया का मांझी,आज मेरी डूबी नौका कोई बचा लो। हे! प्रभु मेरी सांसें तो तुमने छीन ली,अब मेरा शरीर भी अपने पास ले लो। मैं भी अपने पति के साथ ही आपके पास आ रही हूंँ। इस तरह बिलाप कर रही,सभी उसे समझाने लगे।

डॉ.अनीता चौधरी (मथुरा से)