"क्या समझे"

कारवां मैगेज़िन के कवर पेज पर आज एक तस्वीर देखी जिसमें योगी आदित्य नाथ की तस्वीर लगी है, जिसके उपर लिखा aadityanath's reign of terror क्या समझे इसे आतंकी शासक या आतंक के उपर शासन? हिन्दुत्व के दुश्मन कुछ हिन्दुस्तानी ही लगते है। क्या ये कोई षड्यंत्र है? क्यूँ देश में अलगाव फैलाने की कोशिश की जा रही है। 

हिंदुत्व कट्टरपंथियों ने सोशल मीडिया पर अपनी बेचैनी व्यक्त करने के लिए इस समाचार पत्रिका कारवां द्वारा 'आदित्यनाथ के आतंक के शासन' शीर्षक से एक कवर स्टोरी प्रकाशित की और उनको 'हिंसा के पुजारी' के रूप में संदर्भित किया चुनाव से ठीक पहले आदित्यनाथ पर प्रतिकूल कवर स्टोरी के लिए नाराज हिंदुत्व कट्टरपंथी कारवां पत्रिका पर हमला मोल रहे है।

लगता है भारत के लोकतांत्रिक प्रणाली में बाहरी शक्तियों के द्वारा हस्तक्षेप के माध्यम से संस्थानों और लोकतांत्रिक शक्तियों पर संदेह उठाने का षड्यंत्र कुछ दिनों से चलाया जा रहा है। भारत विरोधी ताकतें मिलकर भारत में अराजकता की स्थिति पैदा करने की कोशिश में लगी हुई है, या देश के भीतर ही दुश्मन पनप रहे है।

एक समय मोदी जी के बारे में भी मौत का सौदागर कह कर इनकी छवि को धूमिल करने की कोशिश की गई थी। पर ऐसी हरकत करने वाले ये नहीं जानते की इस तरह उनके ही हाथों एक नया कद्दावर व्यक्तित्त्व गढ़ा जा रहा है। इस तरह के निगेटिव और डिस्प्यूटेड प्रचार के प्रोमोशन से योगी जी और मोदी जी की जोड़ी सुपरहिट होती जा रही है। 

बंगाल में चुनाव के बाद जो हालात पैदा हुए थे शायद यूपी चुनाव के बाद वही मंज़र दोहराने का इरादा लगता है।

वामपंथी पुराना एजेंडा लिंपा पोती करके फैला रहे है। पहले मोदी के लिए करते थे तब गुजरात जबाब देता था आज योगी  जी के लिए कर रहे तब उ.प्र. जबाब देगा

भारत की संस्कृति और धर्म को बचाने की कोशिश को अगर आतंक का शासन कहा जाता है तो ऐसे आतंकी घर घर से पैदा होना चाहिए। हिन्दुत्व के विरोधी कुछ लोगों के पेट में दर्द उठता है जिनको एक कोम को खुश रखते धर्म के नाम पर वोट बटोरने है उनको हिन्दुवाद का समर्थन करने वाले नेता खटकते है। कुछ लोग योगी आदित्य नाथ की छवि को हिटलर के व्यक्तित्व का प्रतिबिम्ब जताने की कोशिश कर रहे है, तो ये समझ लें की हिटलर का प्रभावशाली व्यक्तित्व उसका बढ़िया वक्ता होना और संगठन कर्ता होना ही उसके उदय का कारण था। उसी तरह योगी जी की राष्ट्रवादी नीति और हिन्दुत्ववादी विचारधारा उनको इस्लाम के तरफ़दारों की नज़रों में सरमुखत्यार साबित करती है। पर जो लोग देशप्रेमी है जिनको राष्ट्र से प्रेम है वह योगी जी और मोदी जी के पक्ष में है। बाकी सच कहें तो अब वामपंथियों और हिन्दुत्व के दुश्मनों  के पास नरेंद्र मोदी की केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार को घेरने के लिए कोई भी ठोस मुद्दा नहीं है इसलिए ऐसी ओछी हरकत करते रहते है। वे जिन मुद्दों को उठाते हैं, उसे चंद मिनटों में सोशल मीडिया पर ध्वस्त कर दिया जाता है।

योगी जी साधु है, सर्वधर्म समभाव में मानने वाले, पर उनकी तुलना विराथु से भी कर दो तो भी गलत नहीं, अगर देश की नींव को खोखली करने वालों के ख़िलाफ़ ये इंसान खड़ा है तो क्या गलत है? ऐसा आतंकी शासक मंज़ूर है। जो लोग हिन्दुत्व से डरते है वह हंमेशा योगी जी का हिंदुवादी नेता के तौर पर ही उल्लेख करते हैं, योगी जी सभी धर्मों के साथ बहुत संतुलित है। पर हिन्दु राष्ट्र में  इस्लाम को बढ़ावा देने वालों पर नियंत्रण जरूरी है। और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को उजागर करते अपने देश को बांटने वालों के हाथों से बचाना कोई गुनाह तो नहीं।

वामपंथी मोदी सरकार और योगी सरकार के लिए टूलकिट के जरिए एक गहरा गड्ढा खोद रहे है, पर समझदार जनता जवाब देगी ये भी हकीकत है।

भावना ठाकर 'भावु' (बेंगलूरु, कर्नाटक)