श्रमजीवी पत्रकार यूनियन की विचार गोष्ठी संपन्न, वक्ताओं ने संगठन की मजबूती पर दिया बल

गाज़ीपुर। श्रमजीवी पत्रकार यूनियन शाखा गाजीपुर के तत्वाधान में जिला पंचायत सभागार शनिवार को बैठक एवं गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसका विषय है वर्तमान परिवेश में पत्रकारिता का उत्तर दायित्व एवं चुनौतियां कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण से हुआ। गोष्ठी के मुख्य वक्ता ब्यूरो प्रमुख हिन्दुस्तान अमरमणि त्रिपाठी ने कहा कि पत्रकार अपने दायित्वों का निर्वहन निर्भीकता के साथ करें। उन्होंने कहा कि पत्रकार अपनी कलम से निकले हर शब्द में निष्पक्षता एवं जनहित का ध्यान रखें। चाटुकारिता से बचें।अपनी पहचान अपनी कलम से बनाएं। 

डा०ए०के०राय ने कहा कि संगठन बनाने से नहीं  बल्कि संगठन में एकता और समर्पण की भावना से काम करने से समस्याओं का समाधान होगा। बैचारिक मतभेद शक्ति हीन बना देता है।यह सच है कि संगठन में  वह ताक़त है जो कमजोर को न्याय और ताकतवर को सजा दिलवा सकता है। ऐसा संगठन में संगठित रहने पर ही संभव है।आज के परिवेश में पत्रकारों के हित में अनेकों संगठन  हैं ,परन्तु एक दूसरे के प्रति उदासीनता का भाव  हमारी एकता और आंतरिक शक्तियों के हनन का प्रतीक बनने लगे हैं।जो हम सबके हित में नहीं है। संगठन चाहे जितने हों, जैसे भी हों,जिस उद्देश्य और हित के लिए बना है उस लक्ष्य पर खरा उतरने की आवश्यकता है।

आज के समय की यही मांग है।संघे शक्ति कलियुगे। कवि व पत्रकार गौरीशंकर पांडेय ने कहा कि पत्रकार समाज का वह दर्पण है, जिसके आईने में घटित घटनाओं से लेकर देश और समाज में हो रही हर गतिविधियां साफ दिखाई देती हैं।  पत्रकार सबकी आवाज  है।जरूरत है लेकिन आवश्यकता पड़ने पर पत्रकार की आवाज पत्रकार की जरूरत कोई नहीं बनना चाहता।जो एक दुखद और विचारणीय प्रश्न है। अपनी कई हास्य व्यंग मुक्तकों से आइना दिखाते हुए कहा हम पत्थर की लकीर हैं,जो मिटाए नहीं मिटते हैं। हम झूठ को झूठ और सच को सच लिखते हैं।। पत्रकार रामचन्द्र सिंह ने कहा कि पत्रकार राष्ट्र का सजग प्रहरी है। राष्ट्र और समाज के उत्थान में पत्रकार के योगदान को कभी नहीं भुलाया जा सकता। भुवन चंद जायसवाल ने कहा कि पत्रकारिता स्वाभिमान और सम्मान जनक समाज सेवा है। जिसमें निष्पक्षता और समर्पण साफ दिखता है।

जिसे कलंकित होने से बचाने की आवश्यकता पर बल दिया।बरिष्ठ कवि और पत्रकार दिनेश चंद्र शर्मा ने सभी पत्रकारों का आह्वान करते हुए कहा की "लेखनी की धार को रुकने न देना साथियों। एकता में शक्ति है बंटने न देना साथियों।आए आंधी या तुफान , तुम अपना स्वाभिमान झुकने न देना साथियों"।।

वरिष्ठ पत्रकार एवं कवि विजय कुमार मधुरेश ने कवि और पत्रकार  के आपसी सामंजस्य पर बोलते हुए चोटिले अंदाज में जब अंतर स्पष्ट किया कि 'कवि दिल से और पत्रकार दिमाग से काम चलाता है। कोई राम कोई रहमान से काम चलाता है 'तो हाल तालियों से गूंज उठा। साथ ही झील पर पानी बरसता है हमारे देश में, खेत पानी को तरसता है हमारे देश में, अब विधायक, अफसरों और पागलों को छोड़कर कौन हंसता है हमारे देश में, आदि कई हास्य व्यंग मुक्तकों से कार्यक्रम को ऊंचाई प्रदान किया। 

अंत में उपस्थित पत्रकारों के सम्मान में कलम डायरी और पर्स भेंट कर नव वर्ष की शुभकामनाएं दी गई।इस अवसर पर सत्येन्द्रनाथ शुक्ला, भुवन जायसवाल, दिनेशचंद्र शर्मा, राजेश सिंह, डाक्टर ए० के० राय अभिषेक श्रीवास्तव, विनोद खरवार, रमेश सोनी, उपेंद्र कुमार, सतीश चंद्र जायसवाल, सतीश पांडेय, रामचंद्र सिंह, यशवंत सिंह, मो. ऐनुद्दीन, मो. शहनवाज अंसारी, विजय यादव, विवेक सिंह, अनिल कुमार सिंह अनिलाभ, रमेश यादव, अजय कुमार पांडेय, दिवाकर पांडेय, राकेश पाण्डेय राघव शर्मा आदि उपस्थित रहे। अध्यक्षता संगठन के जिलाध्यक्ष पद्माकर पांडेय तथा संचालन महामंत्री विजय कुमार मधुरेश ने किया। अंत में जिलाध्यक्ष पद्माकर पांडेय ने आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त किया।