विश्व हिंदी दिवस

सरलता से, सहजता से, सुगमता से कहती है।

हिंदी की शब्द सरिता, जीवन के साथ बहती है।।

"हिंदी पढ़ो, हिंदी लिखो, और हिंदी बोलो तुम।

अँग्रेंजी की पड़ी बेड़ियां, मस्तिष्क से खोलो तुम।

लहराता तिरंगा विश्व में बोले हिंदी भाषा,

पूरे विश्व में हिंदी का मित्रों रंग घोलो तुम"।।

 हमारी भाषा अभिव्यक्ति का माध्यम तो है ही, तथा किसी भी देश की संस्कृति, और रीति- रिवाजों , ज्ञान-विज्ञान, साहित्य और सिनेमा को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक,देश दुनिया के कोने- कोने में पहुँचाने का काम करती है, यह एक सेतु का काम करती है।

भाषा किसी देश की जन मानस की भाषा होती है।उसकी संस्कृति गलियों में, चौराहों पर,शिक्षण संस्थानों में, कार्यालयों में, तथा जन-जन की मुखारविंद भी भाषा होती है।

10 जनवरी को हम विश्व हिंदी दिवस मनाते हैं। क्योंकि पहला हिन्दी विश्व सम्मेलन नागपुर में 10 जनवरी 1975 ई. में इसका आयोजन किया गया था।

हर तीन वर्ष बाद हम  हिंदी विश्व सम्मेलन करते हैं।अब इसकी परंपरा ही बन गई है।10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस के रूप में मनाते हैं। पिछली बार हिंदी विश्व सम्मेलन सन् 2018 में मारीसिस में आयोजित हुआ था , और इस बार तय हुआ है-कि, आस्ट्रेलिया के पास देश "फिजी" की राजधानी शोभा में आयोजित होगा।

यह बहुत ही हर्ष एवं गर्व का विषय है कि,"फिजी"राष्ट्र ने भी हिंदी को अपनी राजभाषा के रूप में स्वीकार किया है।

हिंदी एक वैश्विक भाषा की ओर बढ़ रही है। जैसा कि आप सभी को पता है कि , हिंदी 150 देशों के अंदर पढ़ाई-लिखाई जाती है।

इसके अलावा मैं कहना चाहती हूं कि, जहाँ -जहाँ हिंदी प्रेमियों के कदम पड़े हैं, वहाँ -वहां हिंदी का कारवां बढ़ता गया है।हमारा देश सर्व सम्मति से चलने वाला देश है, हमारे देश की नीति हमेशा उदारता वाली ही रही है ।

जय हिंद! जय हिंदी!

डॉ.अनीता चौधरी (मथुरा से)