लो खत्म हुआ ज़िंदगी का सफ़र

लो ख़त्म हुआ उसकी ज़िंदगी का सफ़र,

ना कोई चिंता रही ना कोई फिकर।

बंद करके आंखें सोया आज चैन से,

इस चैन के लिए तरसा वो उम्र भर।


जब तक सांस में सांस रही तिनका तिनका जोड़ा उसने,

आशाओं और उम्मीदों का साथ कभी न छोड़ा उसने,

तय की हिम्मत से ज़िंदगी की हर डगर।

लो खत्म हुआ उसकी ज़िंदगी के सफ़र………


कंधे पर बोझ अनेकों थे आखिर कब तक ढोता वो,

अपनी मजबूरी का रोना आखि़र कब तक रोता वो,

लग गई उसको भी काल की नज़र।

लो ख़त्म हुआ उसकी ज़िंदगी का सफ़र………


लो ख़त्म हुआ उसकी ज़िंदगी का सफ़र,

ना कोई चिंता रही ना कोई फिकर।

बंद करके आंखें सोया आज चैन से,

इस चैन के लिए तरसा वो उम्र भर।


मीनेश चौहान "मीन"

फर्रुखाबाद (उत्तर प्रदेश)