कृषि विज्ञान हमारी कृषि प्रणाली व अर्थव्यवस्था की रीढ़ः कुलाधिपति

- बांदा कृषि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में राज्यपाल ने वुर्चअल किया संबोधित

- दीक्षांत समारोह में 182 छात्राओं को दी गई उपाधियां

बांदा। शनिवार को कृषि विश्वविद्यालय बांदा का सप्तम दीक्षांत समारोह दिनांक 08.01.2022 को अयोजित किया गया। दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलाधिपति माननीया राज्यपाल उ0प्र0 महोदयाश्रीमती आनंदीबेन पटेल, ने वर्चुअल माध्यम से भाग लिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डा0 आर0सी0अग्रवाल (उपमहानिदेशक, कृषि शिक्षा, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली)रहे।

बाँदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, बाँदा के सप्तम् दीक्षान्त समारोह मंे माननीया राज्यपाल महोदया ने वर्चुअल सम्मिलित होकर प्रसन्नता जाहिर करते हुए ऋषि बामदेव जी को, जिनकी तपोस्थली बाँदा है, अपना श्रद्धासुमन अर्पित किया । साथ ही उन्होने कहा कि बुंदेलखण्ड असीम ऊर्जा से युक्त क्षेत्र है। इस क्षेत्र ने एक से बढकर एक महान सपुतों एवं महापुरुषों को जन्म दिया है। यह क्षेत्र ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक रूप से काफी सुदृढ है। इस अवसर पर राज्यपाल ने कृषि उत्पादकता व कृषकों की औसत आय वृद्धि, सिंचाई तकनीकियों के विकास व पशुधन विकास की अपार सम्भावनाआंे के दृष्टिगत उत्तर प्रदेश शासन द्वारा इस कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना की गयी थी, ताकि बुन्देलखण्ड क्षेत्र की कृषि में बहुआयामी विकास हो सके। 

माननीया महोदया ने आज उपाधि प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि वे जीवन की नई चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हो तथा साथ ही यह भी विचार करे कि अर्जित शिक्षा का समाजोपयोगी उद्देश्य क्या हो सकता है। उन्होने कहा कि मुझे आप सभी मेधावी विद्यार्थियों से आशा है कि आप इस विश्वविद्यालय से अर्जित ज्ञान एवं कौशल से देश के सीमान्त एवं मध्यमवर्गीय कृषकों को खेती के उन्नत विधियों द्वारा जीवन स्तर को सुधारने हेतु मार्गदर्शन करंेगें।

कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने कहा कि कृषि विज्ञान हमारी कृषि प्रणाली व अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैै। भारतीय अर्थव्यवस्था मे कृषि के योगदान को और अधिक प्रभावी कैसे बनाया जाये इस विषय पर आप सब नौजवानो को सोचना होगा। पिछले कुछ वर्षो मे भारत मे ऐसे एग्रीटेक र्स्टाटअप की संख्या मे वृद्धि देखी गयी है। जो न केवल तकनिकी को और सुदृढ़ बना रहे है बल्की किसान को अपने जीवन को बेहतर बनाने मे मदद कर रहे है। माननीय कुलाधिपति महोदया ने कहा कि मै आपसे एक बात साझा करना चहुँगी कि खेत मे जो किसान काम करते है वही वैज्ञानिक है उनकेे अनुभव आधारित ज्ञान का लाभ कृषि विश्वविद्यालय के विद्यार्थियो को उनके पास जाकर लेना चाहिये। उन्होने कहा कि यह देखा है कि बहुत से किसानो ने अपने अनुभव और परंपरा के ज्ञान से ऐसे ऐसे उन्नत बीज तैयार किये है जिनसे बेहतरीन फसले मिल सकती है। राज्यपाल महोदया ने कहा कि विद्यार्थी जीवन से ही स्वरोजगार के गुण सिखाये जाने की व्यवस्था र्स्टाटअप निती से की गयी है विश्वविद्यालय मे नवाचार और उद्यमीता विकास के पाठयक्रम शामिल किये जाने की आवश्यकता है। 

राज्यपाल ने कुलपति बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय की सराहना करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा कृषकों, ग्रामीण युवकों एवं महिलाओं को विभिन्न जानकारियाँ जैसे कृषि के क्षेत्र में रोजगार के अवसर, कृषि उद्यमी एवं उद्यमिता विकास, बकरी पालन, मधुमक्खी पालन, मशरूम व्यवसाय, औद्योगिक एकीकृत कृषि प्रणाली, कौशल विकास अधारित प्रशिक्षण, एवं प्रदर्शन के माध्यम से दी जाती हैं। कृषि तकनीकी के क्षैतिज प्रसार हेतु कृषि विज्ञान केंद्रों में संचालित गतिविधियों के अतिरिक्त सफल किसानों के माध्यम से भी तकनीकी हस्तान्तरण का कार्य किया जाता है। विश्वविद्यालय व इसके अन्तर्गत संचालित सभी कृषि विज्ञान केन्द्रों द्वारा बुन्देलखण्ड जलवायु के अनुरूप सीमान्त व लघु कृषकों के लिये उपयुक्त एकीकृत फसल प्रणाली मॉडल तैयार किये गये है, जिनको कृषकों को अपनाने हेतु प्रयास किये जा रहे है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डा0 आर0सी0अग्रवाल ने अपने उद्बोधन मे कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुपालन में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के द्वारा का गठन किया गया। जो नयी शिक्षा नीति के अनुरूप पाठ्यक्रमों में आवश्यक बदलाव एवं विषय विविधता पर कार्य कर रही है। हालांकि सभी विश्वविद्यालय अपने स्तर पर एवं राष्ट्रीय स्तर पर भी विश्वविद्यालयों में बढ़ाना, प्रथम वर्ष के उपरान्त यदि छात्र पढ़ाई छोड़ते हैं तो उनको प्रदान करने का प्रावधान किया जा रहा है। इस हेतु पाठ्यक्रम में कौशल विकास हेतु,एवं कृषि विश्वविद्यालयों को बहु विषयक बनाने हेतु नीति निर्धारण किया जा रहा है। मुझे आशा है कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद विश्वविद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने में आवश्यक संसाधन एवं सहयोग प्रदान करेगी। कुलपति ने अपने उद्बोधन मे अनुसंधान से जुडे़ कार्यो को बताते हए कहा कि अलसी एवं तिल परियोजना के अन्तर्गत वर्ष 2020-21 में बीयूएटी अलसी-3बीयूएटी अलसी-4 तथा बीयूएटी तिल-1 किस्मों को राजकीय एवं केन्द्रीय विमोचन समिति द्वारा विमोचित किया गया है। आगामी वर्ष में विश्वविद्यालय द्वारा शोध हेतु राष्ट्रीय विकास योजना के अन्तर्गत कुल 31, उ0प्र0 कृषि अनुसंधान परिषद के अन्तर्गत कुल 46 एवं बुन्देलखण्ड पैकेज के अन्तर्गत कुल 13 परियोजनाओं का प्रस्ताव प्रेषित किया गया। बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, बांदा ने दो अंतर्राष्ट्रीय संगठनों एवं साथ सहयोगात्मक अनुसंधान कार्य किये जा रहे हैं। माह दिसम्बर 2021 में विश्वविद्यालय ने उष्णकटिबंधीय वन अनुसंधान संस्थान जबलपुर के साथ किया गया है। 

इस सप्तम दीक्षांत समारोह मे विभिन्न महाविद्यालयो के कुल 182 छात्र छात्राओ को मेडल व उपाधी दी गयी। जिसमे कुल मेरिट प्रमाण पत्र प्राप्त करने वालो की संख्या 34 है। इस दीक्षांत समारोह मे श्री नीलेन्द्र त्रिपाठी बी0एस0सी0 आनर्स कृषि को उनके शिक्षा, खेल एवं कल्चरल एक्टीविटी के लिये कुलाधिपति स्वर्ण पदक एवं कुलपति कांस्य पदक से नवाजा गया। इसी क्रम मे सोहम कटियार बी0एस0सी0 आनर्स कृषि आरविन्द यादव बी0एस0सी0 आनर्स उद्यान, शितांशु गुप्ता बी0एस0सी0 आनर्स वानिकी, मंथन चौधरी एम0एस0सी0 कृषि शास्य विज्ञान एवं बृजेश कुमार मौर्या एमएससी उद्यान सब्जी विज्ञान को कुलपति स्वर्ण पदक, अब्दुल हमीद बी0एस0सी0 आनर्स कृषि, वीरेश कुमार बी0एस0सी0 आनर्स उद्यान, आयुषी सिंह बी0एस0सी0 आनर्स वानिकी, कार्तिकेय सिंह एम0एस0सी0 कृषि कीट विज्ञान, अजय कुमार एम0एस0सी0उद्यान फल विज्ञान को कुलपति रजत पदक तथा अभिषेक सिंह बी0एस0सी0 आनर्स वानिकी प्रिन्स साहू एम0एस0सी0 कृषि कीट विज्ञान इमामुद्दीन शाह को कुलपति कांस्य पदक से नवाजा गया।