यूपी में योगी राज के सिर्फ 54 दिन शेष

- काशी में भी सुनाई पड़ा " भागे रे ! हवा खराब ह " का नारा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में योगी राज की उल्टी गिनती शुरू हो गई। बकौल नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी आज यानी 14 जनवरी से इस राज के सिर्फ 54 दिन और शेष रह गए। 55 वें दिन यानी दस मार्च को इसके अंत पर चुनाव आयोग की मोहर लग जाएगी। 

उत्तर प्रदेश से योगी राज के जाने की सुबुगाहट राजनीति से विरत रहने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं में उसी समय हो गई थी, जब समाजवादी चिंतक ओमप्रकाश श्रीवास्तव के निधन पर शोक व्यक्त करने के लिए जौनपुर गए नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी के स्वागत में भारतीय जनता पार्टी के थोक वोटर कायस्थ समुदाय के लोग उमड़ पड़े। 

भारी धक्कामुक्की के बीच एक होटल में जुटे इस समुदाय के एक सैकड़ा वरिष्ठों ने उनसे कहा कि इस बार हम लोग भी साइकिल के साथ हैं। इसे देखकर मौके पर उपस्थित दलित आचार्य डाक्टर दिलीप कुमार गौतम और स्वराज इंडिया के रमेश यादव ने कहा कि सर ! यह उस प्रबुद्ध वर्ग के गुस्से का संदेश है जो भाजपा के साथ है। फिर भी मुझे यकीन नहीं हुआ। मुझे लगा कि अतिथि देव की भावना के तहत ये लोग आए हैं और उसी भावना के तहत बोल रहे हैं।

इस सुबुगाहट पर मुझे थोड़ा यकीन तब हुआ जब भारतीय जनता पार्टी और प्रशासन की संयुक्त कोशिशों के बल पर हो रही सभाओं और रैलियों में भी योगी राज को लेकर निगेटिव टिप्पणी आने लगी। इस सुबुगाहट को आम हवा मिली जब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के विजय रथ के स्वागत में जनसैलाब नज़र आने लगा। उनके साथ योगी सरकार के पूर्व मन्त्री ओमप्रकाश राजभर भीड़ से इस बार अखिलेश का संकल्प करवाने लगे। 

इसी दौरान बसपा का चेहरा रहे लाल जी वर्मा और रामअचल राजभर साइकिल का हैंडिल पकड़ लिए। और तो और बाहुबल की दुनियाँ में भी सिंह बल का जवाब देने वाले पण्डित हरिशंकर तिवारी का कुनबा भी राजनीतिक जंग में योगी राज से दो दो हाथ करने के लिए साइकिल पर सवार हो गया। पश्चिम में मजबूत आधार खड़ा कर चुके रालोद नेता जयंत चौधरी भी  साइकिल के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की घोषणा कर दिए।

 प्रसपा के नेता शिवपाल यादव भी अपने भतीजे अखिलेश यादव को नेता मान लिए। चुनाव लड़ने वाले योद्धा समाजवादी पार्टी ज्वाइन करने लगे तो लोग आमतौर लगने लगे कि इस बार का मुकाबला सीधे सीधे योगी राज और अखिलेश यादव की वापसी के बीच है। वरिष्ठ पत्रकार आशीष वाजपेई जैसे इस बराबरी में अखिलेश यादव को बीस बताने लगे।

इसी तरह की बहस के विपक्ष के कई पूर्व और वर्तमान दिग्गज भी भाजपा में शामिल हुए। इसे लेकर "ईमानदार" पत्रकारों की टीम माहौल बनाने लगी कि सीट भले घट जाए, सरकार तो योगी की ही आनी है कि 11 जनवरी को श्रम मन्त्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने योगी मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया। योगी राज के जाने की सुबुगाहट को यहीं से पर लग गया।

इसी क्रम में 12 जनवरी को वन एवं पर्यावरण  मंत्री दारा सिंह चौहान ने इस्तीफा दे दिया। फिर तो योगी राज की उल्टी गिनती ही शुरू हो गई।तेरह जनवरी को मन्त्री धर्म सिंह सैनी ने इस्तीफा देकर इस उल्टी गिनती को और तेज कर दिया। इस बीच तीन मन्त्री के अलावा विधायक सर्वश्री भगवती सागर, रोशनलाल वर्मा, विनय शाक्य, अवतार सिंह भड़ाना, बृजेश प्रजापति, मुकेश वर्मा, राकेश राठौर, जय चौबे माधुरी वर्मा, आरके  शर्मा और बाला अवस्थी भी भाजपा को टाटा बोल दिए। तकरीबन इतने ही बोलने की कतार में हैं। 

होगा क्या ?  यह तो दस मार्च को पता चलेगा। फिलहाल भाजपा के सर्वाधिक मजबूत गढ़ विरोध की आवाज गूँजने लगी है। लोकतन्त्र सेनानी कुँवर सुरेश सिंह और वरिष्ठ  पत्रकार ब्रजेश राय शर्मा की माने तो "भागे रे ! हवा खराब है" का नारा काशी में फिर से सुनाई पड़ने लगा है। किसान नेता विनोद सिंह का दावा है कि केवल नारे की वापसी मत समझिए, अभी कुछ लोग योगी राज का टिकट भी वापस करेंगे। छात्र नेता रविभान सिंह इस माहौल को लेकर ऐसे खुश हैं जैसे योगी राज के जाते ही काशी विद्यापीठ में छात्रसंघ का चुनाव हो जाएगा। समाजवादी साथी विजय बहादुर राय, अशोक राय, मधुसूदन सिंह और नीरज त्यागी जैसे लोग तो बोलने लगे हैं कि भाजपा गई। इसे लेकर नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी भी साफ साफ बोल रहे हैं कि राहत की सांस लीजिए, योगी राज के अब केवल 54 दिन शेष रह गए हैं।

इसके बाद भी लोकनायक जयप्रकाश नारायण ट्रस्ट, लखनऊ के अध्यक्ष अनिल त्रिपाठी योगी राज के अंत को लेकर मुतमइन नहीं हैं। उनका कहना है कि अभी ईवीएम है, ब्लाक प्रमुख, जिला पंचायत सदस्य और जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में नंगई की पराकाष्ठा को शर्मिंदा करने वाला तन्त्र है, सरकार समर्थक बाहुबली हैं, अकूत धन है। इसलिए यह सरकार आसानी से जाने वाली नहीं है। इससे मुक्ति के लिए इस बार स्वतन्त्रता सग्राम से अधिक कुर्बानी देनी पड़ेगी।