सोशल मीडिया पर प्रचार की 24 घंटे निगरानी शुरू

बस्ती। कोरोना प्रोटोकाल और चुनाव आयोग की सख्ती का असर यह है कि राजनीतिक दलों ने प्रचार का ज्यादातर काम सोशल मीडिया पर करने की तैयारी की है। ऑनलाइन प्रचार के लिए भी अनुमति की जरूरत होती है, लेकिन ज्यादातर नेता और उनके समर्थक बगैर किसी अनुमति के ही मैसेज भेज रहे हैं। दिलचस्प बात यह कि आचार संहिता के पालन का खूब हो हल्ला मच रहा है लेकिन अभी सोशल मीडिया पर प्रचार पर नियंत्रण नहीं हो पाया है। एसपी आशीष श्रीवास्तव का कहना है कि सोशल मीडिया सेल और डिजिटल वालंटियर्स को 24 घंटे अलर्ट रहने को कहा गया है। वह फेसबुक, ट्वीटर, मैसेंजर, व्हाट्सएप सहित अन्य प्लेटफार्म पर नजर रखेंगे। धर्म, जाति विशेष से जुड़े प्रचार-प्रसार की निगरानी करेंगे। उसका खंडन करने के साथ संबंधित जिम्मेदार को जानकारी देंगे। इसके बाद पुलिस मामले की जांच करके कार्रवाई करेगी। गौरतलब यह भी है कि कोरोना के मामले में लगातार बढ़ रहे हैं। संक्रमण के प्रसार को देखते हुए 15 जनवरी तक चुनावी रैलियों पर रोक लगा दी गई है। मौजूदा समय में सोशल मीडिया प्रचार का बड़ा माध्यम बन चुका है। एक पोस्ट देखते ही देखते लाखों लोगों तक पहुंच जाता है। चर्चा का विषय बन जाता है। चुनाव में लोग सोशल मीडिया का सहारा लेंगे। ऐसे में कोई वोट बैंक के चक्कर में धर्म और मजहब से जुड़ी टिप्पणी न करे और माहौल खराब न हो जाए, उसके मद्देनजर सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर विशेष निगरानी की जाएगी। हर पोस्ट पर पुलिस सर्विलांस और साइबर सेल की टीम नजर रखेगी। इसके साथ ही थाना स्तर पर बने डिजिटल वालंटियर को भी एक्टिव किया जा रहा है। चुनाव में प्रचार से जुड़े सोशल मीडिया के पोस्ट पर वे नजर रखेंगे। धर्म, जाति विशेष से जुड़ी टिप्पणी करने और चुनाव में हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश करने वाले को चिह्नित करेंगे। उसके बाद जानकारी देंगे। फिर पुलिस मामले की छानबीन करेगी।