135 करोड़ जनसंख्या के पीएम की सुरक्षा में चूक का मामला गंभीर चिंतनीय

पीएम की सुरक्षा में चूक- अतीत की घटनाओं से सीख लेकर दोबारा चूक ना हो इसके लिए त्वरित जवाबदेही निर्धारित करना ज़रूरी - एड किशन भावनानी

गोंदिया - वैश्विक स्तर पर आतंकवाद एक बहुत बड़ी समस्या बनकर उभरा है जिसका करीब-करीब हर पूर्ण विकसित देश से लेकर आम देशों सहित भारत भी दंश झेल रहा है। जिसमें आंतरिक और बाहरी दोनों आतंकवाद शामिल हैं। कई देशों में हम मीडिया के जरिए देखते हैं कि आंतरिक वायलेंस होता है। कई स्तर पर किसी बाहरी देश द्वारा उस देश में आतंक फैला कर उसे अस्थिर करने की कोशिश की जाती है। मुंबई में बम धमाके, अमेरिका में 9/11 और भारतीय संसद पर हमला इसके मुख्य उदाहरण हैं। 

साथियों बात अगर हम भारत की करे तो पूर्व पीएम इंदिरा गांधी, राजीव गांधी अनेकों छोटे बड़े नेताओं के साथ हुए घटनाओं को देश भुला नहीं हैं। जिसके चलते घटनाओं से सीख लेकर इस बदलते सुरक्षा चक्र और परिवेश में सुरक्षात्मक रणनीतिक रोडमैप बनाकर सुरक्षा व्यवहार, स्थिति चाक-चौबंद की जाती रहीं है।

साथियों बात अगर हम दिनांक 5 जनवरी 2021 को पंजाब के फिरोजपुर में पीएम की सुरक्षा में हुई चूक की करें तो यह 135 करोड़ जनसंख्या के पीएम की सुरक्षा में चूक का मामला है जो बेहद गंभीर व चिंतनीय है और अतीत की घटनाओं से सीख लेकर दोबारा ऐसी चूक ना हो इसके लिए त्वरित ज़वाबदेही का निर्धारण कर कार्यवाही करना तात्कालिक ज़रूरी है। क्योंकि मामला इतना बड़ा और वैश्विक स्तरपर लोकप्रियता में प्रथम क्रमांक पर हमारे पीएम की सुरक्षा के साथ ऐसा होता है तो सुरक्षा के लिए बेहद गंभीर चिंतनीय विषय है। 

साथियों बात अगर हम इस सुरक्षा में हुई चूक के मामले में गंभीरता की करें तो यह मामला कितना गंभीर है इन बातों से पता चलता है (1) दिनांक 6 जनवरी 2022 को माननीय पीएम ने राष्ट्रपति से मुलाकात कर इस घटना की जानकारी दी। (2) विपक्षी पार्टी की उच्च नेता ने पंजाब सीएम से कहा पूरे देश के पीएम हैं जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई करें। (3) मामला सुप्रीम कोर्ट तक जा पहुंचा जिसकी आज सुनवाई होगी। (4)16 पूर्व डीजीपी सहित 27 आईपीएस ऑफीसरों ने राष्ट्रपति को चिट्ठी लिखकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की अपील की। (5) केंद्रीय गृह मंत्रालय ने तीन सदस्यीय कमेटी बनाई जिसमें सुरक्षा सचिव आईबी और एसपीजी के शीर्ष अधिकारी शामिल हैं जिसकी रिपोर्ट तात्कालिक देने को कहा गया है। (6) पंजाब सरकार ने भी उच्च स्तरीय जांच कमेटी बनाई। जिसकी रिपोर्ट 3 दिनों में देने को कही गई है। (7) पूरे देश में पीएम की दीर्घायु के लिए यज्ञ व हवन और प्रार्थनाएं कर दीर्घायु की कामनाएं की जा रही है। (8) अनेक प्रदेशों में कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन कर जवाबदारों पर जवाबदेही निर्धारित कर कार्रवाई करने के लिए मोर्चे निकालें जा रहे हैं। 

साथियों बात अगर हम इस मामले में कुछ बयान बाजीयों की करे तो हमें इसपर हमें 135 करोड़ भारतीयों के पीएम की सुरक्षा में चूक के मामले का संज्ञान लेना होगा क्योंकि यह मामला किसी पार्टी का नहीं हम सबके पीएम की सुरक्षा में बेहद गंभीर चूक है, तथा हमने अतीत में बेहद गंभीर घटनाएं देख चुके हैं और भारी क्षति हम भुगत चुके हैं और अनेक नेता हम खो चुके हैं। वर्तमान में पड़ोसी मुल्क, विस्तार वादी देश सहित अनेक खतरों को देखते हुए हमें अति सुरक्षा के प्रति अति गंभीर संज्ञान लेना अति आवश्यक है। 

साथियों बात अगर हम इस मामले का सुप्रीम कोर्ट में जाने की करें तो , पंजाब के फिरोजपुर में पीएम की सुरक्षा में हुई चूक का मामला सुप्रीम कोर्ट में उठाया गया है। वरिष्ठ वकील  ने चीफ जस्टिस के सामने इस मामले को रखते हुए घटना पर रिपोर्ट लेने और पंजाब सरकार को दोषियों पर कार्रवाई का निर्देश देने की मांग की। वहीं  कोर्ट ने याचिका की कॉपी पंजाब सरकार को सौंपने को कहा। आज शुक्रवार को इसपर सुनवाई होगी। वहीं इस मामले में अब पंजाब सरकार ने उच्च स्तरीय कमिटी का गठन किया है। विभिन्न टीवी चैनलों ने बताया कि समिति में न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त)  और प्रमुख सचिव (गृह मामले एवं न्याय)  शामिल होंगे। प्रवक्ता ने कहा कि समिति तीन दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट देगी।

साथियों बात अगर हम इस पूरे मामले की थ्योरी की करें तो,  टीवी चैनलों के अनुसार बुधवार को पंजाब में पीएम का फिरोजपुर में दौरा था। भारी बारिश के कारण पीएम को सड़क मार्ग से जाना पड़ा लेकिन इस दौरान  हुसैनीवाला से 30 किलोमीटर दूर रास्ते में प्रदर्शनकारी मिल गए जिस कारण उनका काफिला तकरीबन 20 मिनट बेहद असुरक्षित क्षेत्र में रुका रहा। जिस इलाके में पीएम का काफिला रुका था, वह मीडिया के अनुसार संवेदनशील के अलावा हेरोइन तस्करों का गढ़ माना जाता है। पिछले साल सितंबर माह में इसी क्षेत्र में आतंकी वारदात को अंजाम दिया गया था। लिहाजा केंद्रीय गृह मंत्रालय के अलावा पीएम सिक्योरिटी के तमाम अधिकारियों के चेहरे पर शिकन पैदा होना जायज था। इसके बाद से पंजाब में सियासत गरमा गई थी। 

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि 135 करोड़ जनसंख्या के पीएम की सुरक्षा में चूक का मामला चिंतनीय है तथा अतीत की घटनाओं से सीख लेकर दोबारा चूक ना हो इसके लिए त्वरित जवाबदेही निर्धारित करना तत्कालिक ज़रूरी है। 

-संकलनकर्ता लेखक- कर विशेषज्ञ एडवोकेट किशन सन्मुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र