ITR के नियमों में हुए कई बदलाव, तिमाही आधार पर देनी होगी डिविडेंड की जानकारी

नई दिल्ली : वित्त वर्ष 2020-21 से आयकर रिटर्न (आईटीआर) के नियमों में कई बदलाव हुए हैं। एक तरफ सिर्फ वेतन से कमाई करने वालों के लिए आईटीआर भरना बेहद आसान हो गया है। वहीं लाभाशं (डेविडेंड) आय की जानकारी देना तिमाही आधार पर अनिवार्य कर दिया गया है। वित्त वर्ष 2020-21 से पहले किसी वर्ष 10 लाख रुपये तक की डिविडेंड आय पर करदाता को कोई टैक्स नहीं चुकाना होता था क्योंकि संस्थान को डिविडेंड का भुगतान करने से पहले डिविडेंड डिस्ट्रिब्यूशन टैक्स (डीडीटी) चुकाना होता था। 10 लाख रुपये से अधिक की डिविडेंड आय पर करदाता को 10 फीसदी की दर से टैक्स चुकाना होता था। अब वित्त वर्ष 2021 से इन नियमों में बदलाव हुआ है और संस्थान द्वारा बांटे गए डिविडेंड को टैक्स के दायरे में लाया गया है। इसके अलावा नए नियमों के तहत अगर किसी वित्त वर्ष में पांच हजार रुपये से अधिक का डिविडेंड मिलता है तो इस पर 10 फीसदी की दर से टीडीएस काटने की जिम्मेदारी कंपनी की होगी।

अन्य स्रोत से आय के रूप में दिखाना होगा

वित्त वर्ष 2021-22 से पहले डिविडेंड से आय का खुलासा छूट प्राप्त आय के तहत किया जाता था लेकिन अब नए नियमों के तहत इसकी जानकारी अन्य स्रोत से हुई आय के तहत देनी होगी। करदाता को उसी तिमाही में अग्रिम कर का भुगतान करना होगा, जिसमें डिविडेंड मिला है। टैक्स सलाहकार के.सी. गोदुका का कहना है कि अग्रिम कर के भुगतान में डिफॉल्ट होने पर ब्याज की गणना के लिए पूरे वित्त वर्ष में मिले डिविडेंड की जानकारी तिमाही आधार पर देनी होगी। उनका कहना है कि इससे पहले डिविडेंड आय का खुलासा अग्रिम में करना संभव नहीं था तो इस पर अग्रिम कर के भुगतान नहीं करने पर पेनाल्टी नहीं लगती थी। हालांकि अब इस साल से आयकर विभाग ने सभी संस्थानों को चुकाए गए डिविडेंड की जानकारी को विभाग को देना अनिवार्य कर दिया है और यह जानकारी करदाता को पहले से भरी मिलती है। ऐसे में जब आपको आईटीआर में पहले से भरा हुआ डेटा मिले तो उसमें दी गई सभी जानकारी को सावधानी से देखें।