वादे और दावे

जितने विकास के वादे

हमारे नेता करते गये,

यहां उतने ही ज्यादा

हम लोग पिछड़ते गये,


जितनी शांति के वादे

हमारे नेता करते गये,

यहां उतने ही ज्यादा

हम लोग झगड़ते गये,



जितनी खुशहाली के वादे

हमारे नेता करते गये,

यहां उतने ही ज्यादा

हम लोग फटेहाल होते गये,


जितने ज्ञानी होने के दावे

हमारे नेता करते गये,

यहां उतने ही ज्यादा

हम लोग अज्ञानी होते गये,


जितने सभ्य होने के दावे

हमारे नेता करते गये,

यहां उतने ही ज्यादा

हम लोग गालियां बकते गये,


नेताओं ने वादे एवं दावे किए

केवल सत्ता प्राप्ति के लिए,

यहां हम सुधार के लिए

हर बार उन्हें वोट करते गये।


                 जितेन्द्र 'कबीर'