दोहा : पहचान

तेरे   कारिज   ही   सदा, हैं   तेरी  पहचान,

दुनिया  में अच्छे सदा, कर कारिज इंसान।


होता  है   संसार  में,  सदा  श्रेष्ठ  का  नाम,

अस्तु  सदा  ही हों तिरे, सुन्दर उत्तम काम।


उत्तम  को उत्तम  मिले, इस  जग में पहचान,

नाम हुआ गर आपका,जीवन सफल सुजान।


बैभव  को  सब  छोड़िये, तभी  तुम्हारी शान,

इस  समाज  में  है  जदी, तेरी  कुछ पहचान।


कह  रीमा सुन  लीजिये, बड़ा जगत  मे सोइ,

जिस मानव का लेत हैं, सुफल नाम हर कोइ।

         

                                    रीमा सिन्हा,

                             लखनऊ, उत्तर प्रदेश।