रीत बदल ग्ई प्रीत बदल गई

रीत बदल ग्ई प्रीत बदल गई

बदल गई जगत की व्यापार

नजर बदल गई डगर बदल गई

पर ना बदला सूरज का व्यवहार


काम बदल गया दाम बदल गया

बदल गया सुख का दरबार

जाम बदल गया नाम बदल गया

पर ना बदला धरती का प्यार


सूरत बदल गाई सीरत बदल गई

बदल गई प्रेम का पावन संसार

नगर बदल गया समर बदल गया

पर ना बदला पिता का सहचार


नारी बदल गई बेकारी प्रबल हुई

बदल गई बंधन का  परम द्वार

सरकार बदल गई दरबार बदल गई

पर ना बदली माँ की  ममता व दुलार


आकाश बदल गया पाताल बदल गया

बदल गया आस पास का संसार

मानव बदल गया दानव सबल भया

पर ना बदला जन्म दाता परवरदिगार


रूप बदल गई स्वरूप बदल गई

बदल गई समस्त जग में दुर्व्यवहार

इज्जत बदल गई बेईज्जती भर गई

पर ना बदला ज्ञान का ज्ञानी संसार


रोग बदल आरोप बदल गया

बदल गया जन हित का सरोकार

ज्ञान बदल गया विज्ञान बदल गया

पर ना बदला पापी का अत्याचार


उदय किशोर साह

मो० पो० जयपुर जिला बाँका बिहार

954611508