स्वागत है नव वर्ष तुम्हारा

हे ! नव वर्ष तुम्हारा अभिनंदन

तुम   जल्दी    से आ जाओ ।

दो साल मुश्किल से बीते ,

एक एक दिन लगता भारी ।

कोई कुछ ना कर पाया , 

ऐसी थी बेबस लाचारी ।

दुःख ,चिंता और डर को ,

हमसे जल्दी दूर भगाओ ।

हे ! नव वर्ष तुम्हारा अभिनंदन

तुम जल्दी से आ  जाओ ।।1।।

कोरोना रूपी छ्द्म दानव ,

खुलकर घूम रहा है ।

बेकार सभी हैं आयुध अपने

कोरोना झूम रहा है ।

बहुत विकट घड़ी है भैया ,

इससे पार लगाओ ।

हे ! नव वर्ष तुम्हारा अभिनंदन

तुम जल्दी से आ जाओ ।।2।।

कोरोना से सब डरे हुए थे ,

साथ में लाया ओमीक्रान ।

फिर से छाई है अंधियारी

कैसे बचाएं अपने प्रान ।

नई दिशाएं ,नई उमंगे 

जल्दी साथ तुम  ले आओ ।

हे ! नव वर्ष तुम्हारा अभिनंदन

तुम जल्दी से आ  जाओ ।।3।।


डॉ०कमलेन्द्र कुमार श्रीवास्तव