चाय की कहानी

आज बताऊँ आपन जुबानी।

सुनो हमार चाय की कहानी।।


लड़कपन में भई है आदत,

न पीबौ तो मूड़ पिराबत।

मिल जाए बस तनिक नमकीन, 

खाली चाय हमें नहीं भावत।।


ब्याह भयो तो आवत ससुरे,

आपन लाने चाय बनावत।

सबिन्ह को लागी ऐसी आदत,

नेक चाय बनाबौ ध्वनि सुनावत।।


गर्मिन में एकइ कप बहुत है,

अब सर्दिन की बात बतावत।

एक कप कछु होत न भैया,

चार बैर हमें चाय बुलावत।।


औरन की हम बात न जाने,

इक कप चाय ठंड भगावत।

आपन राज की बात बतावत,

चाय के बादहिं पनिया पीवत।।


अल्मारिन की भई हमार दुकान,

आपन दुख हम सबै बतावत।

चार कप चाय तनिक भेजौ

दिन में चारहि बार सुनावत।।


गीता देवी

औरैया उत्तर प्रदेश