तरवां डबल मर्डर का सफल अनावरण

तरवां आजमगढ। घटना का पूर्व का विवरण– दिनांक 29.11.2021 को श्री उदय प्रताप उर्फ प्रधान पुत्र स्व0 रामनगीना राम सा0 पित्थौरपुर थाना तरवां जनपद आजमगढ़ उपस्थित थाना हाजा आकर  एक अदद हिन्दी लिखित प्रार्थना पत्र बाबत अपने पिता रामनगीना राम पुत्र स्व0 लालता राम उम्र करीब 50 वर्ष व अपनी माता मंशा देवी पत्नी रामनगीना राम उम्र करीब 47 वर्ष को अज्ञात बदमाशो द्वारा धारदार हथियार से माकरक हत्या कर देने के सम्बन्ध मे दाखिल किये की  वादी के लिखित तहरीर के आधार पर मु0अ0स0196/2021 धारा 302 भा0द0वि0 बनाम अज्ञात पंजीकृत किया गया ।

गिरफ्तारी विवरण- प्रकरण को तत्काल संज्ञान में लेकर घटना के अनवारण हेतु पुलिस अधीक्षक आजमगढ़ श्री अनुराग आर्य द्वारा टीम गठित कर सम्बन्धित को आवश्यक दिशा निर्देश दिया गया। सर्विलांस सेल, मुखबिर खास की सूचना व साक्ष्य संकलन के आधार पर थानाध्यक्ष व मय एसओजी टीम द्वारा मु0अ0स0196/2021 धारा 302 भा0द0वि0 मे विवेचना से प्रकाश में आए अभियुक्त 1.अखिलेश यादव पुत्र राजेन्द्र यादव सा0 गिलवारा थाना सिधारी जनपद आजमगढ़ 2. जितेन्द्र कुमार मलिक उर्फ जे के मलिक पुत्र सुरेश राम सा0 हमीरपुर सैदवारा थाना रानी की सराय जनपद आजमगढ़ 3. गोलू उर्फ सर्वेश यादव पुत्र मंगरू यादव सा0 तमोली थाना रानी की सराय जनपद आजमगढ़ 4.सिंटू यादव पुत्र सरभू यादव सा0 गिलवारा थाना सिधारी जनपद आजमगढ़ 5.धर्मेन्द्र  यादव पुत्र रामसकल यादव सा0 रूपाली कालोनी थाना कंधरापुर जनपद आजमगढ़ 6.रमाकान्त यादव पुत्र मुंशी यादव निवासी कोठिया थाना रानी की सराय  आजमगढ़ 7.ज्योति कौशल प्रताप सा0 पित्थौरपुर थाना तरवां आजमगढ़ को ग्राम पित्थौरपुर थाना तरवां आजमगढ़ को ग्राम पित्थौरपुर के पास से गिरफ्तार किया गया। 

 गिरफ्तारी का स्थान–    ग्राम पित्थौरपुर थाना तरवां आजमगढ़

 पूछताछ का विवरण- अखिलेश यादव पुत्र राजेन्द्र यादव सा0 गिलवारा थाना सिधारी जनपद आजमगढ़ पूछ ताछ से बता रहा है कि पंकज और जे के मलिक से मेरी दोस्ती काफी दिनों से है। घटना से पांच दिन पहले झारखण्डे मंदिर पर पंकज बोला कि मेरी प्रेमिका ज्योति कौशल प्रताप सा0 पित्थौरपुर थाना तरवां आजमगढ़ के ससुर की हत्या करनी है। उसका ससुर लेखपाल है। लेखपाल की हत्या हो जाने पर उसके पति को नौकरी मिल जायेगी। और कुछ दिनों बाद पति की हत्या कर देने पर नौकरी ज्योति को मिल जायेगी फिर हम और ज्योति मौज करेंगे और वहां जो गहना मिलेगा जो करीब 10, 12 लाख का है। वह तुम ले लेना फिर घटना से दो दिन पहले बताया कि 28 तारीख को चलना है। 28 तारीख को उसने एक दूसरे मोबाइल से फोन कर मुझे झारखण्डे मंदिर पर बुलाया ।  पंकज 6.30 बजे शाम को अपनी मोटरसाइकिल स्पलेण्डर से आया। पंकज ने अपनी गाड़ी में बंधा लोहे का राड मुझे दिया ,फिर उसकी मोटरसाइकिल पर मैं बैठ गया और बेलइसा चौराहे पर मै अपने मोबाइल जो डिस्चार्ज हो रही थी चार्ज पर लगाने के लिए दे दिया। फिर हम लोग छतवारा आये। और बोगरिया बाजार से होते हुए नहर पकड़कर ग्राम पित्थौरपुर की तरफ चल दिये कि रास्ते में चनरा देवी कालेज के पास समय करीब 7.30 बजे शाम को दोनों लोग बीयर पिये तथा कुछ बीयर को मोटरसाइकिल के नंबरप्लेट पर गिराकर उसपर धूल पोत दिये ताकि नंबर प्लेट पढने में न आने पाये  और 9 से 9.30 बजे के करीब हम दोंनो लोग लेखपाल के नए मकान से पहले नहर पुलिया के पास चकरोड़ पर अंदर ले जाकर अपनी मोटरसाइकिल खड़ा कर दिये और वहीं रुके रहे। कुछ देर बाद लेखपाल अपनी पत्नी के साथ अपने पुरान घर से आये। करीब एक डेढ घंटे बाद पंकज ने डिग्गी से बांका निकाला और मैं राड लिया। और लेखपाल के मकान की तरफ खेत से होते हुए चल दिये। हम दोनों लोग लेख पाल की खिड़की से अंदर घुसे। लेखपाल रामनगीना और उनकी पत्नी एक ही चौकी पर  दोनों मच्छरदानी लगाकर गहरी नींद में सो गए थे। मैं अपने हाथ में लिए राड से मच्छरदानी हटाकर लेखपाल का सिह खीचकर एक जोरदार वार लेखपाल के सिर पर किया। और पंकज यादव ने अपने हाथ में लिए बांका से ताबडतोड़ उसकी गर्दन व चेहरे पर कई बार वार किया , इसी बीच उसकी पत्नी जग गयी। और हमलोगों से भीड़ गयी। तो मैने लेखपाल रामनगीना की पत्नी का हाथ पकड़कर जमीन पर पटक दिया और  तबतक पंकज यादव ने लेखपाल को छोड़कर लेखपाल की पत्नी मंशा देवी के ऊपर कई बार वार कर दिया। जब हम लोगों को इत्मिनान हो गया कि दोनों मर गये है। तो हम दोनों लोग धीरे से खिड़की के रास्ते निकलकर अपनी मोटरसाइकिल के पास आये। पंकज ने अपने हाथ में लिए बांका को मुझे पकड़ाया, मैं पीछे बैठ गया  और मोटरसाइकिल स्टार्ट कर भाग लिए। और बोंगरिया बाजार से बाहर नहर की पटरी पकड़कर सिंहपुर की तरफ जा रहे थे कि आगे झाड़ झंखाड दिखायी देने पर मैने पंकज से गाडी रोकवाकर राड व बांका नहर में फेक दिया। तथा घटना के समय पंकज यादव एक और बांका लिया था जो अपने बाये हाथ से भी वार कर रहा था। उसको वह अपने पास लेकर चला गया उसको वही बता सकता है कि उसे वह कहा रखा है । उसके बाद हम दोनों लोग गोलू उर्फ सर्वेश के घर पर आये सर्वेश ने मोटरसाइकिल साफ किया उसके बाद हमलोग सिंटू यादव के घर आये वहां सिंटू के घर हमलोग 2 दिन रूके फिर अगले दिन सिंटू से 1000 रू लिए तथा मै अपना शर्ट सिन्टू के घर ही छोड़ दिया क्योकि उसपे खून के धब्बे  लगे थे , फिर हम लोग पंकज के जीजा धर्मेन्द्र यादव के घर आये और वहीं पर पंकज के जीजा धर्मेन्द्र यादव तथा उनकी मां फूलमती देवी व भाई बबलू यादव   ने हम लोगों के रुकने की व्यवस्था किया ।  पंकज के जीजा के यहां 3 दिन रुकने के बाद हमलोग पंकज क घर आये। जहा पर पंकज के पापा रमाकान्त यादव व कमला देवी ने हम लोगों को घर में छिपने की व्यवस्था किया। पंकज के घर 2 दिन रुकने के बाद हम लोगों को डर लगने लगा कि कहीं पुलिस पकड़ ने ले हम लोग वहां से भागकर पहले गोरखपुर गए वहां से बनारस गए। आज हम और पंकज बनारस से किसी तरह से जे के मलिक से संपर्क किया और हालचाल लिया कि पित्थौर पुर वाली घटना में क्या चल रहा है। तो जे के मलिक ने कहा कि मैं और गोलू  इस समय सिंहपुर पुलिया पर है तो मुझसे  पंकज ने कहा कि  अखिलेश  तुम  चले जाओ वही पर गोलू और मलिक पुलिया पर है बुला रहे है चूकिं मुझे काफी  लोग  ऊधर जानते पहचानते है मलिक और गोलू से मिलकर जरा ज्योति  से मिल लेना और ऊधर की हाल चाल लेकर आओ तब मुझे बताओ। इस बात पर मैं  पंकज को छोड़कर सिंहपुर नहर पुलिया पर आया जहा गोलू यादव और जे0के0 मलिक खड़े थे । मै और  जे के मलिक और गोलू से आपस में बातचीत कर रहे थे कि साहब तभी आप लोगों ने पकड लिया ।

घटना का संक्षिप्त- विवरण पंकज यादव व उसकी प्रेमिका ज्योति का प्रेम प्रसंग था प्रेम प्रसंग व उसके श्वसुर के नौकरी व धन के लालच मे आकर ज्योति व उसके प्रेमी पंकज यादव उसके मित्र जे.के. मलिक द्वारा योजना बनाकर ज्योति श्वसुर व सास रामनगीना राम पुत्र स्व0 लालता राम व मंशा देवी पत्नी रामनगीना राम की  दिनांक 29.11.2021 को हत्या कर देना व हत्या कर के गोलू उर्फ सर्वेश यादव पुत्र मंगरू यादव सा0 तमोली थाना रानी की सराय जनपद आजमगढ़ के घर रूकना व सर्वेश द्वारा मोटरसाइकिल साफ करना उसके बाद हमलोग सिंटू यादव पुत्र सरभू यादव सा0 गिलवारा थाना सिधारी जनपद आजमगढ़ द्वारा रूकने का व्यवस्था करना उसके बाद पंकज के जीजा धर्मेन्द्र यादव के घर आये और वहीं पर पंकज के जीजा धर्मेन्द्र यादव तथा उनकी मां फूलमती देवी व भाई बबलू यादव ने हम लोगों के रुकने की व्यवस्था किया उसके बाद हमलोग पंकज क घर आये। जहा पर पंकज के पापा रमाकान्त यादव व कमला देवी ने हम लोगों को घर में छिपने की व्यवस्था किया।