छापेमारी किया आइ टी ने हुए, किरकिरी सरकार की

-विधानसभा चुनाव के ऐन पहले कार्रवाई से निशाने पर बीजेपी

-सपा मुखिया के करीबियों के यहां छापा खड़ा कर गया सवाल

-पीएम-सीएम व बीजेपी नेताओं के खिलाफ मुखर हैं राजीव राय

मऊ : जनपद में आज सूबे में एक साथ सपा मुखिया अखिलेश यादव के तीन करीबियों के यहां आयकर विभाग के छापे के पीछे वजह चाहे जो हो, लेकिन इस घटनाक्रम ने सरकार की किरकिरी करा दी। विधानसभा चुनाव के ऐन पहले इस तरह के ऐक्शन ने यूपी में प्रमुख विपक्षी दल समाजवादी पार्टी को सरकार पर सवाल खड़ा करने का अवसर दे दिया। मऊ में सपा के राष्ट्रीय सचिव व प्रवक्ता राजीव राय के यहां की गई छापेमारी को भाजपा चाहे जिस रुप में प्रस्तुत करे, लेकिन आमजन के बीच राय को सहानुभूति ही मिली। वजह यह है कि राजीव राय चैनलों पर होने वाले डिबेट से लेकर जनसभाओं तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, गृहमंत्री अमित शाह समेत भाजपा नेताओं व उनकी नीति के खिलाफ मुखर होकर बोलते हैं।

जन का विश्वास जीतने की बीजेपी की जुगत

विधानसभा चुनाव 2022 बेहद करीब है। सत्तारुढ़ दल बीजेपी दोबारा सत्ता पाने के लिये लोगों का विश्वास जीतने का हर हथकंडा अपना रही है। सैदपुर के सपा विधायक सुभाष पासी समेत तमाम नेताओं को भगवा धारण कराकर अपनी लोकप्रियता साबित कर रही है। जनविश्वास रैली कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के किये गये कार्यों को गिनाया जा रहा है। आवास, शौचालय, कोरानाकाल से अब तक मुफ्त राशन, किसान सम्मान निधि समेत तमाम लाभकारी योजनाओं के लाभार्थियों का वोट मिल सके, इसकी जुगत की जा रही है। भारी बहुमत से सरकार बनाने का दावा भी किया जा रहा है।

अखिलेश भी ला रहे मजबूती

मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी बीजेपी सरकार को विकास के मायने में फेल साबित बता रही है। सपा मुखिया अखिलेश यादव अपने दल को मजबूत बनाने के लिये हर दिन बसपा, भाजपा, कांग्रेस के किसी ने किसी दिग्गज नेता को जोड़ रहे हैं। जयंत चौधरी का लोकदल, ओमप्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी, संजय चौहान की जनवादी पार्टी समेत कई दलों व संगठनों से गठबंधन हो चुका है। प्रगतिशील समाजवादी पार्टी बना चुके शिवपाल सिंह यादव से हाल ही में अखिलेश यादव की मुलाकात के बाद उनसे भी मिलाप हो गया। उत्तर प्रदेश में सपा मुखिया विजयरथ लेकर चल रहे हैं। वह महंगाई, बेरोजगारी व कोरोना काल में लोगों को झेलनी पड़ी दुश्वारियों की याद दिलाकर बीजेपी को सत्ता से बेदखल करने की हर जिले में आवाज उठा रहे हैं।

डिबेट में सरकार को घेरते हैं प्रवक्ता

समाजवादी पार्टी का पक्ष टीवी चैनलों पर रखने के लिये प्रवक्ता नामित हैं। राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव राय अपनी बेबाकी के लिये जाने जाते हैं। वह घोसी लोकसभा से चुनाव भी लड़ चुके हैं। वह आज तक, एबीपी न्यूज, इंडिया न्यूज, एनडीटीवी समेत तमाम चैनलों पर भारतीय जनता पार्टी की सरकार की नाकामियों को दमदारी से गिनाते हुए उनकी पोल खोलते हैं। राजीव राय की बेबाकी को पूरा देश जानता है। अखिलेश यादव के वह अति करीबी हैं, इसको हर दल के लोग जानते हैं। ऐसे में उनके समेत अखिलेश के मुख्यमंत्रित्व काल में ओएसडी रहे जैनेंद्र यादव व मैनपुरी के जिला पंचायत अध्यक्ष मनोज यादव के यहां शनिवार को कुछ समय के अंतराल पर आयकर विभाग की टीम की छापेमारी किया जाना भाजपा सरकार पर ही सवाल खड़ा कर गया। छापेमारी की वजह भले ही इनकम से संबंधित हो, लेकिन मऊ में एक दिन पहले गृहमंत्री अमित शाह का 21 दिसंबर को जनविश्वास रैली को संबोधित करने का कार्यक्रम आना और उसके अगले दिन दहशत बनाने को राजीव राय के यहां छापेमारी के कनेक्शन से जोड़कर देखा जा रहा है।

अमित शाह के कार्यक्रम पर है नजर

गृहमंत्री अमित शाह का कार्यक्रम घोसी विधानसभा क्षेत्र के भिखारीपुर में लगते ही शुक्रवार को राजीव राय ने यह जानकारी पार्टी के मुखिया तक पहुंचाई थी। शीर्ष नेतृत्व से उन्हें शाह के कार्यक्रम पर पैनी नजर रखने व मऊ में ही जमे रहने का निर्देश मिला। श्री राय अपने करीबियों के साथ अमित शाह की रैली पर पैनी नजर रखने की शुक्रवार की देर शाम रणनीति भी बनाये। शाह के संबोधन के तत्काल बाद उनके भाषण की काट निकालकर जनता के सामने मीडिया व सोशल मीडिया के जरिये रखने की उनकी तैयारी है।

जनता बतायेगी नफा-नुकसान

उनके यहां आयकर विभाग के छापा को सपाई भाजपा सरकार की बौखलाहट व द्वेष के चलते की गई कार्रवाई बताते हुए जनता की सहानुभूति समाजवादी पार्टी के पक्ष में जोड़ने में जुट गये हैं। उधर राजीव राय ने खुद भी कहा कि उनके खिलाफ ऐक्शन राजनीतिक द्वेष व परेशान करने के उद्देश्य से लिया जा रहा है। बहरहाल जो भी हो यह आने वाला वक्त बतायेगा कि सपा नेताओं के यहां आयकर विभाग की छापेमारी को जनता किस रुप में ले रही है। 2022 में अगर भाजपा सत्ता में वापसी कर लेती है तो माना जाएगा कि इस तरीके की कार्रवाई उसके लिये फायदेमंद हुई। अगर सत्ता से बेदखल होती है और समाजवादी पार्टी की सरकार बनती तो यह माना जाएगा कि यह कदम बीजेपी सरकार के लिये नुकसानमंद साबित हुआ।