थोड़ी खुशियों को हम बांट आया करें

"चलो खुशियों के पौधें लगाया करें,

थोड़ी खुशियों को हम बांट आया करें।


 कोई रोता मिले तो हंसाया करें ,

थोड़ा उसके भी संग मुस्कराया करें ।


 है मुश्किल बड़ी जीवन की डगर, 

हौसलों के हम दीपक जलाया करें ।


खुद के हिस्से की थोड़ी सी जीवन निधि,

 संग दूजे के हम बांट आया करें।


राह मिल जाए टूटा व हारा हुआ,

प्यार से उसकी हिम्मत बढ़ाया करें।


कुछ भी स्थिर नही, दुनिया यह पानी है,

बन कहानी यह मौजों संग बह जानी है।


दरिया छोटा भी मिल जाए गर स्नेह का ,

प्यार से उसमें डुबकी लगाया करें।


हौसलों के दीपक जलाया करें

हौसलों के दीपक जलाया करें"


मधुलिका राय, "मल्लिका"  

गाजीपुर (उत्तरप्रदेश)