नन्दमहर धाम पर दो दिवसीय मेला

जिला संवाददाता - देवेन्द्र द्विवेदी

अमेठी।कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर नन्दमहर धाम मे लगने वाले मेले की तैयारियॉ शुरु हो गई है मेले मे दूरदराज की लगने वाली दुकाने सजने लगी है जिसमे देश व प्रदेश के विभिन्न जिलो के यादव समाज के साथ सभी वर्गो व धर्मो के श्रद्वालु शामिल होते है जो अपने कुलश्रेष्ठ के लगाव मे खिंचे चले आते है जो कि श्रीकृष्ण व बलराम की कर्मस्थली के रुप मे विख्यात है अपनी मान्यता पूरी होने पर दूध व झण्डे का चढावा करते है वही प्रशासन के लिये मेले मे पंयजल व रात्रि सुरक्षा व्यवस्था सबसे बडी समस्या हो सकती है विदित हो कि जिला मुख्यालय गौरीगंज से सोलह किमी दूर गौरीगंज मुसाफिरखाना मार्ग के पास नन्दमहर धाम स्थित है जहॉ पर कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर दो दिवसीय मेले का आयोजन होता है जिसमे हजारो की संख्या मे नन्द बाबा धाम पर श्रद्वालुओ की  भीड जुटती है मंदिर मे अपनी मनलोकामना पूरी करने के लिए मत्था टेकते और प्रसाद चढाते है मंदिर से जुडी सर्वविदित मान्यता है कि जब कोई गाय व भैंस बच्चे को जन्म देती है तब उसका दूध चढाने के बाद ही लोग दूध का इस्तेमाल करते है इस धाम पर देश की कई राष्ट्रीय व प्रदेश स्तर की राजनैतिक हस्तियॉ आ चुकी है पौराणिक मान्यता है कि महाभारत काल मे नन्दमहर गॉव का साम्राज्य पौंड्रक के हाथा मे था राजा पौड्रक खुद को बासदेव बताता था इस बात की खबर जब वासुदेव को हुई तो वह नाराज होकर श्रीकृष्ण व बलराम को उसका बध करने को भेज दिया।वध करने के कई दिन गुजर जाने के बाद जब दोनो भाई घर नही पहुॅचे। तो नन्द बाबा उन्हे खेजते हुए नन्द महर पहुॅच गए।और यहॉ रुककर हवन पूुजन किया।उन्ही की याद मे नन्द बाबा का मंदिर का निर्माण किया गया।मंदिर के महन्त भारतनन्द बताते है कि सैकड़ों वर्षेा से मेला लगता चला आ रहा है यहॉ पर यदुवंशियो का महाकुम्भ लगता है नन्दमहर धाम के आस पास के गॉव नरायनपुर ,केशवपुर,वसायकपुर व नदियावा समेत कई गॉव श्रीकृष्ण के नाम से बसे हुए है जिससे इस मान्यता को बल मिलता है कि कभी भगवान् श्रीकृष्ण का इस स्थान पर पदार्पण हुआ था भाजपा शासनकाल मे नन्दमहर धाम को पर्यटक स्थल घोषित किया गया था र्प्यटक स्थल होने का बोर्ड मंदिर की छत पर पडा रहने से खराब हो गया । लेकिन र्प्यटक स्थल घोषित होने के बावजूद भी शासन-प्रशासन से कोई मदद नही मिल रही है।