'एक अद्भुत लेखिका मन्नू भंडारी को हार्दिक श्रद्धांजली'

पाठकों को एक से बढ़कर एक कहानी, उपन्यास और नाटक का उपहार देने वाली 1931 में जन्मी हिन्दी साहित्य की दिग्गज लेखिका मन्नू भंडारी का निधन साहित्य जगत को सूना कर गया। मन्नू भंडारी को श्रेष्ठ लेखिका होने का गौरव हासिल है। उन्होंने कहानी और उपन्यास दोनों विधाओं में कलम चलाई है। उनकी लेखनी की इंतेहाँ राजेंद्र यादव के साथ लिखा गया उनका उपन्यास 'एक इंच मुस्कान' में दिखती है, वो उपन्यास पढ़े-लिखे और आधुनिक लोगों की दु:खभरी प्रेमगाथा का आईना है। विवाह टूटने की त्रासदी में घुट रहे एक बच्चे को केंद्रीय विषय बनाकर लिखे गए उनके उपन्यास 'आपका बंटी' को हिंदी के सफलतम उपन्यासों की कतार में रखा जाता है। आम आदमी की पीड़ा और दर्द की गहराई को उकेरने वाले उनके उपन्यास 'महाभोज' पर आधारित नाटक खूब लोकप्रिय हुआ था। इनकी 'यही सच है' कृति पर आधारित 'रजनीगंधा फ़िल्म' ने बॉक्स ऑफिस पर खूब धूम मचाई थी।

मन्नू भंडारी एक भारतीय लेखक थी जो 1950 से 1960 के बीच अपने बेनमून  कार्यो के लिए जानी जाती थी। सबसे ज्यादा वह अपने दो उपन्यासों के लिए प्रसिद्ध थी। पहला आपका बंटी और दूसरा महाभोज। 

उनके लेख हमेशा लैंगिक असमानता और वर्गीय असमानता और आर्थिक असमानता पर आधारित होते थे। उन्हें हिन्दी अकादमी, दिल्ली का शिखर सम्मान, बिहार सरकार, भारतीय भाषा परिषद, कोलकाता, राजस्थान संगीत नाटक अकादमी, व्यास सम्मान और उत्तर-प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा पुरस्कृत।

भंडारी को के.के.बिरला फाउंडेशन की तरफ से उनकी आत्मकथा एक कहानी यह भी के लिए "व्यास सम्मान" से सम्मानित किया गया। यह अवार्ड हर साल हिंदी साहित्य में अतुलनीय उपलब्धियाँ प्राप्त करने वाले इंसानों को दिया जाता है यही बात साबित करती है की मन्नू भंडारी एक उच्च कोटि की लेखिका थी।

मन्नू भंडारी का जन्म 3 अप्रैल 1931 को मध्य प्रदेश के मंदसौर में हुआ था, वह दिल्ली यूनिवर्सिटी के मिरांडा हाउस कॉलेज में पढ़ाती थीं। उन्होंने 'मैं हार गई', 'तीन निगाहों की एक तस्वीर', 'एक प्लेट सैलाब', 'यही सच है', 'आंखों देखा झूठ' और 'त्रिशंकु' जैसी कई कहानियां भी लिखीं।

उन्होंने हिंदी प्रोफेसर के रूप में अपने करियर की शुरुवात की, वे विक्रम यूनिवर्सिटी की उज्जैन प्रेमचंद सृजनपीठ में डायरेक्टर भी थी। ऐसी महान विभूति को हार्दिक श्रद्धांजली।

भावना ठाकर 'भावु' (बेंगुलूरु, कर्नाटक)