कवि की दुनिया न्यारी है

सच कलम कवि पर भारी है

जज़्बात चोरनी कलम लिखने

को सदैव जज़्बात जारी है।।

रोके कवि खुद को पर कलम

जज़्बात में गहरी यारी है।।


कवि की दुनिया न्यारी है।।2।।


लिखे बगैर ना रह पाए कवि

कलम मज़बूर करे ये प्यारी है ?

पर सुकून भी पाता ये हर कवि

तभी तो कलम जज़्बातों के 

हर चित्कार लिख कहे ये बेचारी है।।


कवि की दुनिया न्यारी है।।२।।


उफ्फ़ ये कम्बख्त जज़्बात कवि के

दिल में उमंगे शौर ही सदैव भारी है

क्या करे बेचारा कवि कलम , जज़्बात

दिल के उमंगों का कायल सदाचारी है।।


कवि की दुनिया न्यारी है।।२।।


वीना आडवानी तन्वी

नागपुर, महाराष्ट्र