मेरा नाम हो रहा है

राधे मैं हूँ और तू है       

पर तू है तो मैं हूँ l

मैं जब तुझमे खोता हूँ 

#शांति के द्वार पर होता हूँ l 

समझ पाता हूँ तब ही 

राधा और कृष्ण क्या है l 

क्यों #मीरा #कृष्ण की दीवानी थी 

 वह भौतिकता जान चुकी थी l

 जब अच्छा करता हूँ तो 

मैं( हम) #कृष्ण को याद करता हूँ 

राधे तू कर रहा है और 

मेरा नाम हो रहा है यहाँ l 

 पर जब कोई गलती हो तो 

मैं तुझे दोष क्यों लगाऊं l

 तू तो #अंतर्यामी है राधे 

सब कुछ जान रहा है l 

जन्म दिया है तूने मुझे

बुद्धि देकर छोड़ दिया है l

अपनी मति का प्रयोग कैसे करूँ 

 है सब मुझ पर निर्भर l

गलतियां भी #ईश्वर कराता 

तो नहीं देता जन्म धरा पर l 

घोर #पाप जब बढ़ जायेगा 

तो कृष्ण धरा पर आएगा l

पाप ही नहीं पापी भी मिट जायेंगे 

वो सँभलने का मौका दे रहा है l

राधे मैं हूँ और तू है

पर तू है तो मैं हूँ l 

 पूनम पाठक बदायूँ 

इस्लामनगर