रावण का अट्टहास

जलता हुआ रावण

अट्टहास कर उठा.।

हा-हा-हा-हा!कहने लगा.

मेरे कलयुगी भाइयों

तुम तो शक्ति के उपासक हो

नौ देवियों का वरदान प्राप्त कर

मुझे जलाया है!

यही वरदान तुमने पाया है?

देखो मै जीवित हूँ तुम सब में

मैं तो राक्षस हूँ!

तुम तो मनुष्य हो?

फिर क्यों है?

तुममें दम्भ और अभिमान!

असत्य और अन्याय!

द्वेष और दुराचार!                                       

मैने तो सीता का 

हरण मात्र किया

किन्तु तुम क्यों करते हो,                   

वासना पूर्ति हेतु

बालाओं का बलात्कार!

अबलाओं पर अत्याचार!

मुझे जलाने के बाद भी

मैं जीवित बचा हूँ

तुम सब में!हा-हा-हा-हा!

त्रेता के राम ने 

मुझे मार तो दिया।

किन्तु मेरे कलयुगी भाइयों

तुम सब मुझे

प्रत्येक वर्ष जीवन दे रहे हो!

मेरे अस्तित्व को 

विस्तार दे रहे हो!

मेरी अजेयता को

अमरत्व दे रहे हो!

तुम जला कर भी

मुझे मार नही पाओगे!

जब तक तुम

धर्मज्ञ,कृतज्ञ,सत्यनिष्ठ 

और सदाचारी नही हो जाओगे!

जब तक तुम

राम नही हो जाओगे!

मै जीवित रहूँगा तुममें

अनंत काल तक!

तुम्हारे विनाश काल तक!

तुम्हारे सर्वनाश काल तक!

हा-हा-हा-हा!


नीरजा बसंती

गोरखपुर-उत्तरप्रदेश