बारिश

आफिस से रानी और सब सखियां साथ ही शॉपिंग के लिए निकल पड़ी। अभी उनकी टोली हंसती मुस्कराती थोड़ी दूर आगे बढ़ ही रही थी, कि जोर से बारिश आ गयी। सामने दिख रही धर्मा की दुकान में बारिश से बचने के लिए सब सखियां आ गयी। जहां महिलाये हो और सजने का सामान सामने सजा रखा हो वो चुप कैसे रहे"?

रानी ने कहा, "भैया, वो हरी कामदार चूड़ियां दिखाओ।"

"लीजिए, मैम मेरे पास हर कलर की चूड़ियां हैं।"

आई थी सब बारिश के बचने और खरीदारी शुरू कर दी।

और महीने भर की कमाई एक घंटे में हो गयी, रंग बिरंगी छतरी भी कइयों ने ली।

एक घंटे बाद बारिश रुकी और सब तितलियां निकल पड़ी।

धर्मा ऊपर आकाश को देखते हुए बोल पड़ा, "हे ईश्वर, ऐसी नेमतों की बारिश रोज हो।"

स्वरचित

भगवती सक्सेना गौड़

बैंगलोर