देश की कानून व्यवस्था पर विश्वास कायम रखें

कानून को मजाक समझना और सरेआम उसकी धज्जियां उड़ाना आजकल हाई प्रोफाइल लोगों और समाज के एक तथाकथित वर्ग का शौक बन गया है। आए दिन अखबारों में पढ़ने को मिलता रहता है कि आज अमुक सेलिब्रिटी ने यह जुर्म किया आज फलां हीरो ने कानून को दरकिनार कर कोई ऐसा काम किया इसके लिए कानून में सख्त से सख्त सजा का प्रावधान है या फिर कभी किसी नेता अभिनेता के बच्चे किसी गैर कानूनी गतिविधि में संलिप्त पाए गए। ना जाने ऐसे कितने ही समाचार हम सभी को प्रतिदिन देखने पढ़ने को मिलते रहते हैं।

वह चाहे फिर एजाज खान हो ,रिया चक्रवर्ती हो,गौरव दिक्षित ,सारा अली खान ,दीपिका पादुकोण या कोई अन्य,ऐसे ही बहुत से नामी-गिरामी सेलिब्रिटीज का नाम दिन प्रतिदिन अवैध अर्थात संदिग्ध गतिविधियों और गैर कानूनी कामों के साथ जुड़ा पाया जाता है। 

खैर,मेरे आज के इस आलेख का उद्देश्य इसी अमुक या यूं कहें किसी विशेष वर्ग को सही या गलत ठहरा कर उनकी पैरवी करना बिल्कुल नहीं है ।ना ही इस लेख के माध्यम से मैं यह बताना चाहती हूं कि अमुक अभिनेता का अमुक कार्य गैरकानूनी है और उन्हें उनके इस कृत्य हेतु सजा मिले। सजा देना ,न्याय देना,फैसला करना ये सब कानून के काम हैं जो हमारे देश की न्यायिक व्यवस्था बड़े ही कुशलता पूर्वक कर रही है। यहां मेरे कहने का तात्पर्य सिर्फ इतना है कि हमें हर हाल में देश की कानून व्यवस्था पर विश्वास कायम करना होगा और न्याय व्यवस्था का साथ देना होगा ताकि एक सुदृढ़ और मजबूत राष्ट्र की नींव रखने में हम अपना योगदान दे पाएं।

दोस्तों,एक बात तो सच है कि कानून को हाथ में लेना और उसके साथ खेलना शायद आज की युवा पीढ़ी का शौक बन गया है ।कहने का तात्पर्य है कि जो लोग इस प्रकार की कानूनी रूप से गलत गतिविधियों में संलिप्त नहीं होते वे स्वयं को दूसरे से कम समझते हैं और हीन भावना का शिकार हो जाते हैं अर्थात अत्याधुनिक बनने की होड़ में वर्तमान युवा पीढ़ी किसी ना किसी गैर कानूनी काम में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप में खुद को संलिप्त रखे रहना चाहती है ताकि समाज के सामने उनकी एक अलग और ख़ास इमेज बरकरार रहे, उनके फैन फॉलोअर्स ज्यादा से ज्यादा बनें और हर किसी की जुबान पर सिर्फ और सिर्फ उनका ही नाम हो।अपनी एक अलग और नई पहचान बनाने की अंधी दौड़ में ये लोग इस कदर उन्मादी हो जाते हैं कि सही और गलत ,कानूनी और गैरकानूनी का फर्क तक भूल जाते हैं और समाज के सामने एक ऐसा उदाहरण प्रस्तुत कर डालते हैं जिससे समाज का पतन होना आरंभ हो जाता है।

दोस्तों यह बात सच है कि नेता और अभिनेता दोनों ही आम जनता की निगाह में उनके आदर्श बन जाते हैं और आम जनता अपने आदर्श की नकल करने में जरा भी देर नहीं लगाती ।परंतु ,जब उनके आदर्श उनके सामने ऐसे गलत उदाहरण प्रस्तुत करते हैं तो वे स्वयं भी इन अवैध गतिविधियों में शामिल होना चाहते हैं जिसकी वजह से धीरे धीरे समाज में हिंसा का जन्म होता है और समाज का पतन होना आरंभ हो जाता है। याद रहे कि हम एक सभ्य समाज के सुशिक्षित और सुसंस्कृत नागरिक हैं और अपने समाज में शांति कायम करना और नैतिक मूल्यों को विकसित करना तथा मानवीय मूल्यों को स्थापित करना हम सभी की ना केवल नैतिक जिम्मेदारी है अपितु सामाजिक कर्तव्य भी है । स्मरण रहे, जिस देश के नागरिक चरित्रवान, सुसंस्कृत तथा सुशिक्षित होते हैं उस देश को विकसित राष्ट्र बनने से कोई नहीं रोक सकता।

समाज हम सभी से मिलकर बनता है ।यदि कभी समाज के किसी वर्ग विशेष से कोई चूक हो जाती है, गलती हो जाती है कोई अपराध हो जाता है तो उन्हें उसका एहसास कराना जरूरी होता है। गैर कानूनी गतिविधियों को अभी भी किसी भी दशा में कानूनी रूप से सही नहीं ठहराया जा सकता। देश की न्यायिक व्यवस्था का सम्मान करना और उसके फैसले का आदर करना हम सभी का दायित्व बनता है।समाज में अराजकता ना फैले, इसके लिए हम सभी को माननीय कोर्ट के फैसलों और कानून व्यवस्था पर अपनी आस्था बनाए रखनी होगी और देश के समुचित विकास हेतु गलत को गलत कह कर सही का साथ देना होगा और यदि हम ऐसा करने में असफल रहते हैं तो वह दिन दूर नहीं जब इंसान इंसान को ही मार कर अपना पेट भरेगा और हम सभी एक बार फिर असभ्य, जंगली और पाशविक प्रवृत्ति वाले समाज में रहने को विवश होंगे।

पिंकी सिंघल

अध्यापिका

शालीमार बाग दिल्ली